हर महीने पीरियड्स के साथ आने वाला दर्द और मूड स्विंग्स तो आम बात है, लेकिन कई महिलाओं को पीरियड्स में माइग्रेन की समस्या होती है। पेट दर्द और हार्मोन इम्बैलेंस के साथ-साथ सिर का दर्द भी असहनीय हो जाता है। लेकि क्या आपने सोचा है कि पीरियड्स में माइग्रेन क्यों होता है? इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे निपटा जा सकता है? आइए इस आर्टिकल में इसके कारणों के साथ इसे फिक्स करने का तरीका भी जानें।
आख़िर पीरियड्स में माइग्रेन क्यों होता है?
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पीरियड्स के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होते हैं और इसी से सिरदर्द या माइग्रेन होता। दरअसल, एस्ट्रोजन का लेवल पीरियड्स शुरू होने से ठीक पहले अचानक गिर जाता है। यह हार्मोन सिर्फ पीरियड्स ही नहीं, बल्कि दिमाग के केमिकल्स (neurotransmitters) को भी प्रभावित करता है। जब इसका लेवल तेजी से नीचे आता है, तो दिमाग की नसें ज्यादा सेंसिटिव हो जाती हैं। इससे माइग्रेन ट्रिगर हो जाता है।
इसके साथ ही, शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन्स (Prostaglandins) का स्तर भी बढ़ जाता है। ये ऐसे केमिकल्स होते हैं जो यूट्रस लाइनिंग को बाहर निकालने में मदद करते हैं, लेकिन साथ ही दर्द और सूजन को भी बढ़ा देते हैं। यही कारण है कि सिर्फ पेट में ही नहीं, बल्कि पीरियड्स में माइग्रेन का दर्द भी उठता है।
इसके अलावा, लाइफस्टाइल में बदलाव से भी माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है-
- पीरियड्स के दौरान शरीर पहले से ही थका हुआ होता है। अगर नींद पूरी न हो, तो माइग्रेन की संभावना और बढ़ जाती है।
- हार्मोनल बदलाव के कारण स्ट्रेस लेवल बढ़ सकता है, जो माइग्रेन को ट्रिगर करने वाला एक बड़ा फैक्टर है।
- कभी ज़्यादा कॉफी पी लेना या अचानक कम कर देना, दोनों ही माइग्रेन को भड़का सकते हैं। इसी तरह, लंबे समय तक भूखे रहना या अनहेल्दी खाना भी असर डालता है।
- कई बार हम ध्यान नहीं देते, लेकिन कम पानी पीना से सिरदर्द बढ़ सकता है। अगर आप ध्यान न दें, तो फिर पीरियड्स में माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।
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पीरियड माइग्रेन के लक्षण क्या हैं?
पीरियड्स में माइग्रेन होना सामान्य सिरदर्द नहीं होता है। इसके लक्षण अलग होते हैं:
- सिर के एक तरफ धड़कता हुआ तेज दर्द
- मिचली या उल्टी
- तेज रोशनी और आवाज़ से परेशानी
- चक्कर या थकान महसूस होना
- फोकस करने में दिक्कत
यह दर्द आमतौर पर पीरियड्स शुरू होने से 1-2 दिन पहले या शुरुआती दिनों में ज़्यादा होता है।
पीरियड्स में माइग्रेन से कैसे निपटें?

अच्छी बात यह है कि कुछ छोटे-छोटे बदलाव इस दर्द को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं:
- हर किसी के ट्रिगर्स अलग होते हैं। इसलिए अपने ट्रिगर्स को हमेशा नोट करें।
- सोने और खाने का समय फिक्स रखने से हार्मोनल फ्लक्चुएशन्स का असर थोड़ा कम हो सकता है।
- पानी ज़्यादा पिएं और मैग्नीशियम-रिच फूड (जैसे केला, नट्स) डाइट में शामिल करें।
- बहुत ज़्यादा या अचानक कम कैफीन दोनों माइग्रेन ट्रिगर कर सकते हैं।
- सिर या गर्दन पर ठंडी पट्टी लगाने से आराम मिल सकता है।
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अगर दर्द ज़्यादा है या हर महीने हो रहा है, तो डॉक्टर से बात करना ज़रूरी है। कुछ मामलों में दवाइयां या हार्मोनल थेरेपी मदद कर सकती है।
पीरियड्स के दौरान माइग्रेन होना आम है, लेकिन इसे सहना आपकी मजबूरी नहीं है। थोड़ी समझ, सही रूटीन और समय पर ध्यान देकर आप इस दर्द को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं, ताकि हर महीने के वो दिन थोड़े आसान बन सकें।
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