खांसी-ज़ुकाम से उबरते ही हम अक्सर मान लेते हैं कि अब सब ठीक है। आप फिर से काम में लग जाते हैं, रूटीन वापस पटरी पर आ जाता है। लेकिन कुछ ही दिनों में गला फिर खराब हो जाता है, हल्का बुखार और वही दवाइयों का सिलसिला शुरू हो जाता है। अगर यह पैटर्न आपको जाना-पहचाना लगता है, तो इसे हल्के में लेने की बजाय समझना ज़रूरी है। बार-बार बीमार पड़ना काफी इरिटेट भी कर देता है, इसलिए इसकी वजह पता हो तो इलाज आसान हो जाता है।
डॉक्टर्स के अनुसार, बार-बार बीमार पड़ने की वजह अक्सर कोई एक बड़ी बीमारी नहीं होती, बल्कि कई छोटी-छोटी आदतों और कारणों का मिला-जुला असर होता है। क्यों कुछ लोग हर हफ्ते बीमार पड़ते हैं, यह सवाल हमने सफदरजंग हॉस्पिटल में कम्युनिटी मेडिसिन के फॉर्मर हेड डॉ. जुगल किशोर से किया। उन्होंने इसके कुछ कारण बताए हैं, आइए जानें।
1. पूरी तरह ठीक होने से पहले ही रूटीन में लौटना

जैसे ही हमें थोड़ा बेहतर महसूस होता है, हम तुरंत अपने काम और जिम्मेदारियों में लौट आते हैं। बाहर से भले ही लगे कि लक्षण कम हो गए हैं, लेकिन शरीर के अंदर रिकवरी अभी भी चल रही होती है। इस समय शरीर को आराम की ज़रूरत होती है, ताकि वह पूरी तरह से ठीक हो सके। अगर इस स्टेज पर हम खुद को फिर से बिजी कर देते हैं, तो शरीर कमजोर ही रह जाता है। यही कारण है कि अगला इंफेक्शन जल्दी पकड़ लेता है और बार-बार बीमार पड़ना एक पैटर्न बना जाता है।
2. नींद पूरी न होना
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद सबसे पहले प्रभावित होती है। कभी देर रात तक फोन चलाना, कभी काम की वजह से नींद पूरी न होना, ये सब धीरे-धीरे शरीर पर असर डालते हैं। नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि शरीर के रिपेयर और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का समय होती है। जब नींद पूरी नहीं होती या उसका पैटर्न बिगड़ता है, तो शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। शुरुआत में इसका असर साफ नहीं दिखता, लेकिन कुछ समय बाद यह भी बार-बार बीमार पड़ने का कारण बन सकता है।
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3. रोज़ाना इंफेक्शन का एक्सपोज़र
हम रोज़ाना कई ऐसी जगहों पर जाते हैं जहां इंफेक्शन का खतरा बना रहता है, जैसे ऑफिस, मेट्रो, बस या भीड़-भाड़ वाले बाजार। यह एक्सपोज़र हमारे कंट्रोल में पूरी तरह नहीं होता। आमतौर पर शरीर इन छोटे-मोटे कीटाणुओं से लड़ने में केपेबल होता है, लेकिन जब आपकी इम्यूनिटी कमजोर होती है, तो यही नॉर्मल एक्सपोज़र बार-बार बीमारी का कारण बन सकता है। खासकर अगर आप लगातार लोगों के संपर्क में रहते हैं, तो यह खतरा और बढ़ जाता है। नतीजा यह होता है कि बार-बार बीमार पड़ना एक पैटर्न बन जाता है, जिसे हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
4. लगातार बना रहने वाला तनाव

तनाव हमेशा दिखाई नहीं देता, लेकिन इसका असर बहुत गहरा होता है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी चिंताएं, काम का दबाव या पर्सनल लाइफ की उलझनें, ये सब मिलकर एक ऐसा बैकग्राउंड तनाव बनाते हैं, जिसे हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन यह तनाव शरीर की रिकवरी को धीमा कर देता है, नींद को प्रभावित करता है और इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाता है। ऐसे में शरीर के लिए इंफेक्शन से लड़ना और भी मुश्किल हो जाता है। इसलिए तनाव भी बार-बार बीमार पड़ने का कारण होता है।
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5. खाने की अनियमित आदतें
हम अक्सर अपने खाने के पैटर्न पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। कभी ब्रेकफास्ट छोड़ देना, कभी बहुत देर से खाना या फिर बार-बार जंक फूड खाना… ये आदतें धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करती हैं। शरीर को सही समय पर और बैलेंस्ड न्यूट्रिएंट्स न मिले, तो वह थका हुआ और कमजोर महसूस करने लगता है। इसका असर सिर्फ ऊर्जा पर नहीं, बल्कि इम्यूनिटी पर भी पड़ता है, जिससे बार-बार बीमार पड़ना शुरू हो जाता है।
इन सभी कारणों, जैसे आधी-अधूरी रिकवरी, नींद की कमी, रोज़ाना इंफेक्शन का एक्सपोज़र, लगातार तनाव और अनियमित खानपान को देखने के बाद यह साफ हो जाता है कि बार-बार बीमार पड़ना किसी एक बड़ी समस्या का नहीं, बल्कि कई छोटी लापरवाहियों का नतीजा है। अगर समय रहते इन आदतों पर ध्यान दिया जाए, तो इस चक्र को आसानी से तोड़ा जा सकता है।
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