कभी ऐसा हुआ है कि कोई अचानक आपकी दुनिया में आ जाता है… और फिर धीरे-धीरे आपकी पूरी दुनिया उसी के इर्द-गिर्द घूमने लगती है? सुबह उठते ही उसका ख्याल, दिनभर उसी की याद… और रात को सोने से पहले आखिरी सोच भी वही। उसका एक मैसेज आए तो दिन बन जाता है, और अगर वो रिप्लाई न करे, तो मन बेचैन हो जाता है। पहली नज़र में ये प्यार जैसा लगता है, लेकिन हो सकता है ये प्यार नहीं बस प्यार का ख़ुमार हो या Limerence। आपको पता है Limerence का मतलब क्या है?
इस आर्टिकल में चलिए जानते हैं कि Limerence क्या है और यह किस तरह प्यार से एकदम अलग होता है।
आख़िर क्या है Limerence?
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सीधी भाषा में कहें तो limerence एक ऐसी सिचुएशन है जिसमें आप किसी के लिए बहुत गहरा, लेकिन एकतरफा आकर्षण महसूस करते हैं। कई बार आपकी फीलिंग्स बेकाबू हो जाती हैं। यह फीलिंग इतनी तेज़ होती है कि आपका मूड, आपकी सोच… सब कुछ उस इंसान के बिहेवियर पर निर्भर करने लगता है।
प्यार में आप सामने वाले को समझते हैं, उसे जानने की कोशिश करते हैं। लेकिन limerence में आप उसे अपनी सोच के हिसाब से देखने लगते हैं। आप एक मीठे ख़ुमार में होते हैं।
Limerence इतना गहरा क्यों हो जाता है?
आपको यह जानना ज़रूरी है कि Limerence अचानक नहीं होता। इसके पीछे कई छोटे-छोटे साइकोलॉजिकल और इमोशनल फैक्टर्स काम करते हैं, जो मिलकर इस इंटेंस फीलिंग को पैदा करते हैं। अगर इसे थोड़ा गहराई से समझें, तो आप खुद भी अपने पैटर्न्स पहचान पाएंगे।
1. अनिश्चतता है बड़ा कारण
Limerence का सबसे बड़ा फ्यूल कन्फ्यूजन है। जब आपको यह साफ नहीं होता कि सामने वाला क्या महसूस करता है, तो दिमाग खुद ही गैप्स भरने लगता है।
“उसने ऐसा क्यों कहा?”
“उसने स्टोरी देखी, रिप्लाई क्यों नहीं किया?”
ऐसे सवाल बार-बार दिमाग में घूमते रहते हैं। और जितनी ज़्यादा अनिश्चितता, उतना ज़्यादा दिमाग उसी इंसान में उलझता जाता है।
2. डोपामीन इफेक्ट है कारण
जब वो इंसान आपको थोड़ा-सा अटेंशन देता है, जैसे- एक मैसेज या एक कॉम्प्लीमेंट, तो आपको बहुत अच्छा लगता है। इससे आपके दिमाग में डोपामीन रिलीज होता है और आपको रिवॉर्ड मिलने जैसा फील होता है।
लेकिन ये है कि ये अटेंशन हमेशा नहीं मिलता। यही ‘कभी हां, कभी ना’ वाला पैटर्न आपको और ज़्यादा हुक कर देता है।
3. वैलिडेशन की कमी के कारण
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कई बार limerence हमारे अंदर की किसी कमी से जुड़ा होता है। अगर आपको अटेंशन, प्यार या वैलिडेशन की कमी महसूस होती है, तो limerence उस खाली जगह को भरने लगता है।
वो इंसान आपके लिए सिर्फ एक व्यक्ति नहीं रहता, वो एक फीलिंग बन जाता है, जो आपको कम्प्लीट महसूस कराती है।
4. अटैचमेंट स्टाइल के कारण
कुछ लोग बहुत ज़ल्दी अटैच हो जाते हैं। उन्हें हमेशा रिजेक्शन का डर रहता है। ऐसे लोग जल्दी इस limerence में फंसते हैं। आप बार-बार एक चीज़ को लेकर कन्फर्म करते हो। इसलिए जब किसी रिश्ते में क्लेयरिटी नहीं होती, तो उसका दिमाग और ज़्यादा सोचने लगता है।
5. कुछ नया होने के एक्साइटमेंट के कारण
जब कोई नया इंसान आपकी जिंदगी में आता है, तो स्वाभाविक उत्साह होता है। लेकिन अगर उस एक्साइटमेंट के साथ अंसर्टेनिटी भी जुड़ जाए, तो वो सिंपल अट्रैक्शन से बढ़कर limerence बन सकता है।
कैसे पहचानें कि आप प्यार में नहीं बल्कि ख़ुमार में हैं?
प्यार का ख़ुमार होना भी गलत नहीं है, लेकिन यह एकतरफा ऑब्सेशन होना गलत है। Limerence के साइन्स कुछ इस तरह से दिखते हैं-
- आप हर वक्त उसी के बारे में सोचते रहते हैं।
- उसकी छोटी-सी बात भी आपको बहुत बड़ी लगती है।
- वो थोड़ा भी दूर हो जाए, तो आपका मूड खराब हो जाता है।
- आप उसके साथ भविष्य के सपने देखने लगते हैं, भले ही असल में ज़्यादा बात न हुई हो।
- उसकी कमियां भी आपको नज़र नहीं आतीं।
और सबसे अजीब बात? अगर वो आपको इग्नोर करे या किसी चीज़ के लिए मना कर दे, तब भी यह फीलिंग स्ट्रॉन्ग और इंटेंस रहती है।
प्यार से कैसे अलग है Limerence?
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Limerence आपको प्यार लग सकता है, लेकिन यह उससे बिल्कुल अलग है। Limerence इंटेंस होता है। यह अनस्टेबल होता है, जिसमें फीलिंग्स, उम्मीदें और बेचैनी सब साथ-साथ चलते हैं। आपको कनेक्शन गहरा लग सकता है, लेकिन वो बस इमैजिनिंग पर बेस्ड होता है।
जबकि, प्यार थोड़ा शांत होता है। उसमें जल्दबाज़ी नहीं होती, बल्कि एक ठहराव होता है। प्यार में आपसी सहमति होती है, एक्सेप्टेंस होता है और इमोशनल सेक्योरिटी होती है। Limerence एंग्जायटी क्रिएट करता है, लेकिन प्यार आपको सुकून देता है।
मगर limerence से निकलने का तरीका क्या है? सबसे पहले ये समझना ज़रूरी है कि ये जो आप महसूस कर रहे हैं, वो बहुत सच्चा लग रहा है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि वो हकीकत पर टिका हो।
अगर आप यह समझना चाहते हैं कि आपकी फीलिंग्स कितनी सही हैं, तो कुछ समय के लिए उस व्यक्ति से दूरी बनाएं।
बार-बार उनका प्रोफाइल देखना, उनके बारे में सोचना, इसे कम करना पड़ेगा। और सबसे ज़रूरी है कि अपना ध्यान वापस अपनी चीज़ों पर लेकर आएं।
दोस्तों के साथ समय बिताएं, अपनी हॉबी पर ध्यान दें। अगर फिर भी मुश्किल लगे, तो किसी एक्सपर्ट से बात करना बिल्कुल सही है।
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