कभी आपने गौर किया है कि आपकी ज़िंदगी में रिश्ते बदलते रहते हैं, लेकिन कहानी वही रहती है? शुरुआत में सब कुछ बहुत अच्छा लगता है। सामने वाला इंसान समझदार, केयरिंग और बिल्कुल परफेक्ट लगता है। फिर धीरे-धीरे वही रिश्ता आपको थकाने लगता है, आपको खुद पर शक होने लगता है और आप सोचते रह जाते हैं कि आखिर मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?  यही टॉक्सिक रिलेशनशिप होता है।

अगर आप भी बार-बार ऐसे रिश्तों में फंस जाते हैं जो आपको सुकून देने के बजाय तोड़ते हैं, तो यह सिर्फ आपकी किस्मत या गलती नहीं है। इसके पीछे आपके मन, आपकी सोच और आपके पुराने अनुभवों का गहरा असर होता है। इसे समझना ही इस पैटर्न से बाहर निकलने की शुरुआत है।

टॉक्सिक रिलेशनशिप से क्या मतलब है?

one sided relationship

Toxic Relationship ऐसा रिश्ता होता है जिसमें आपको खुशी, सुकून और सपोर्ट मिलने के बजाय स्ट्रेस, दुख और असुरक्षा ज़्यादा महसूस होती है। शुरुआत में ऐसा रिश्ता बहुत अच्छा लग सकता है। लेकिन धीरे-धीरे यह रिश्ता आपको इमोशनली थका देता है और आपकी मेंटल पीस को खत्म करने लगता है।

क्यों आप बार-बार टॉक्सिक रिलेशनशिप में फंसते हैं?

दर्द भरे रिश्ते लगते हैं अपने

कई बार हम बार-बार ऐसे रिश्तों में फंस जाते हैं जो हमें सुकून नहीं, बल्कि स्ट्रेस देते हैं। इसकी एक बड़ी वजह है- “जानी-पहचानी फीलिंग” या “Familiar Pain” का एहसास होना।

अगर आपका बचपन ऐसे माहौल में बीता है जहां कभी प्यार मिला, कभी नहीं… कभी समझा गया, कभी नज़रअंदाज़ किया गया तो आपका दिमाग उसी तरह के बिहेवियर को नॉर्मल मान लेता है।

ऐसे में जो रिश्ता उतार-चढ़ाव भरा होता है, वही आपको सच्चा लगता है, जबकि असल में वही टॉक्सिक रिलेशनशिप की शुरुआत है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको दर्द पसंद है, बल्कि आपका दिमाग उसी चीज़ को ढूंढता है जो उसे पहले से जानी-पहचानी लगती है। आप उस पेन से रिलेट कर पाते हैं।

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लो सेल्फ-एस्टीम के कारण

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आप खुद को कितना अहम मानते हैं, इसका सीधा असर आपके रिश्तों पर पड़ता है। अगर आपके अंदर यह फीलिंग है कि शायद मैं इतना अच्छा ट्रीटमेंट डिज़र्व नहीं करता/करती, तो आप दूसरों की गलत बातों को भी सहने लगते हैं।

ऐसे में आप हर बात समझाने लगते हैं। सामने वाले को खुश रखने की हर वक्त कोशिश करते हैं और गलती न होने पर भी ब्लेम ले लेते हैं। ऊपर से यह सब लॉयल्टी या प्यार लगता है, लेकिन ये तरीके आपकी लो सेल्फ-एस्टीम को दर्शाते हैं। टॉक्सिक रिलेशनशिप में आपको अक्सर यह डर रहता है कि कहीं सामने वाला आपको छोड़ न दे।

ट्रॉमा बॉन्डिंग के कारण

अगर आप नोटिस करें, तो देखेंगे कि कुछ रिश्तों में एक अजीब-सा पैटर्न बन जाता है। पहले तकलीफ, फिर प्यार… पहले लड़ाई, फिर अचानक देखभाल और अटेंशन मिलने लगती है। धीरे-धीरे आपका दिल और दिमाग इसी पैटर्न के आदी हो जाते हैं।

इसमें जब लड़ाई होती है, तो शरीर में स्ट्रेस बढ़ता है और जब पैच-अप होता है, तो अच्छा महसूस होता है। यही साइकिल बार-बार चलती है और आपको उस इंसान से स्ट्रॉन्ग अटैचमेंट हो जाता है। इसलिए इस तरह के टॉक्सिक रिलेशनशिप से बाहर निकलना मुश्किल लगता है।

टॉक्सिक रिलेशनशिप से बाहर निकलने के तरीके-

अगर आपको लगता है कि आपकी ज़िंदगी में बार-बार ऐसे दोस्त या पार्टनर आते हैं जो आपको इस्तेमाल करते हैं, आपको समझते नहीं या आपको इमोशनली थका देते हैं, तो अब वक्त है कुछ चीज़ें बदलने का।

1. Boundaries बनाना सीखें

क्या आपको “ना” कहने में दिक्कत होती है? क्या आप दूसरों की खुशी के लिए खुद को परेशान कर लेते हैं? बस इसी कारण से टॉक्सिक लोग आपका फायदा उठाते हैं।

आपको ये समझना होगा कि आपकी भी अपनी ज़रूरतें हैं। हर बात मानना आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है और कभी-कभी कुछ चीज़ों के लिए ना कहना चाहिए।

हां, शुरुआत में थोड़ा अजीब लगेगा, गिल्ट भी होगा, लेकिन यह हर बार हां कहने से ज़्यादा अच्छा है। जब आप अपनी सीमाएं सेट कर देंगे, तो बहुत से लोग अपने आप आपकी ज़िंदगी से दूर हो जाएंगे।

2. हर किसी को फिक्स करना आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है

क्या आप हर बार सोचते हैं कि “मैं इसे बदल दूंगा/दूंगी” या “मैं इसे समझा लूंगा/लूंगी”? तो थोड़ा रुकिए। टॉक्सिक लोग अक्सर चाहते हैं कि आप उनकी ज़िम्मेदारी उठाएं और उनके आगे-पीछे घूमें।

मगर सच्चाई यह है कि उनकी समस्याएं कभी खत्म नहीं होतीं। आज एक इश्यू होता है, तो कल दूसरा। और आप ऐसे टॉक्सिक रिलेशनशिप में फंसकर उनकी समस्याओं को सुलझाना अपनी ज़िम्मेदारी मान लेते हैं।

आपको ये समझना ज़रूरी है कि किसी को बचाना या ठीक करना आपका काम नहीं है। अगर सामने वाला बदलना ही नहीं चाहता, तो आप कुछ नहीं कर सकते। आप जितना इन्वेस्ट करेंगे, उतना ही इमोशनली ड्रेन होंगे।

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3. सेल्फ अवेयरनेस भी है ज़रूरी

हम दूसरों की गलतियां जल्दी देख लेते हैं, लेकिन अपनी आदतों पर ध्यान नहीं देते। कभी खुद से पूछिए कि क्या मैं हर बार लोगों को खुश करने की कोशिश करता/करती हूं?

क्या मैं रेड फ्लैग्स को इग्नोर करता/करती हूं?

क्या मैं ज़रूरत से ज़्यादा एक्सप्लेन करता/करती हूं?

हो सकता है अनजाने में आप भी कुछ ऐसे पैटर्न फॉलो कर रहे हों, जिनकी वजह से आप टॉक्सिक रिलेशनशिप में फंसते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि आप गलत हैं, बल्कि यह कि अब आप अवेयर हो रहे हैं।

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