आपने सिंगर नेहा ककक्ड़ की फैमिली ‘रिश्ते खत्म’ होने वाले पोस्ट्स देखे ही होंगे। अरमान मल्लिक भी 2025 में अपने परिवार से रिश्ते खत्म कर चुके हैं। अभी ताज़ा-ताज़ा मामला डेविड बेकम की फैमिली का चल रहा है। आज लोगों बहुत आसानी से Cut-off culture को फॉलो करने लगे हैं।
आज के समय में अगर कोई रिश्ता थोड़ा-सा हैवी लगने लगे, थोड़ा-सा अनकम्फर्टेबल हो जाए, या बस एक्सपेक्टेशन पर ख़रा न उतरे, तो एक सेंटेंस बहुत कैजुअली बोल दिया जाता है, ‘अब हमारा उनसे रिश्ता नहीं है।’ यही Cutt-off culture है, जहां रिश्तों को संभालने से ज़्यादा उनसे बाहर निकलना आसान होता है।
अब सवाल है कि क्या हम सच में अपनी मेंटल पीस को चुन रहे हैं या हम धीरे-धीरे थोड़ा-सा भी इमोशनल एफर्ट देने से भाग रहे हैं?
Cut-off Culture क्या है?

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सीधी भाषा में कहें तो Cut-off Culture एक ऐसा ट्रेंड है जहां लोग किसी भी रिलेशनशिप को अचानक, बिना किसी एक्सप्लेनेशन के खत्म कर देते हैं। इसे Ghosting या Going No Contact भी कहते हैं।
साइकोलॉजिस्ट बताते हैं कि यह एक ऐसा कल्चरल शिफ्ट है जहां लोग अपनी मेंटल हेल्थ और पीस को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देते हैं। और इसमें गलत कुछ भी नहीं है, लेकिन सिर्फ तब जब यह सही कारणों से किया जाए।
Cut-off Culture को फॉलो क्यों कर रहे हैं लोग?
1. इमोशनली थक जाने के कारण
सबसे पहला और सबसे बड़ा कारण इमोशनल एग्जॉशन है। हम अपने करियर, पर्सनल लाइफ और फ्यूचर को लेकर पहले ही परेशान है। जब ज़िंदगी के बाकी एरिया भी हैवी लगने लगते हैं, तो रिश्तों में आने वाली थोड़ी-सी भी इमोशनल रिस्पॉन्सिबिलिटी लोगों को एक्स्ट्रा बर्डन लगने लगती है। ऐसे में जब कोई रिश्ता एफर्ट्स मांगता है, तो लोग उसे संभालने के बजाय छोड़ देना ज़्यादा आसान समझते हैं। और यही वजह है कि वे Cut-off culutre को फॉलो कर रहे हैं।
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2. सोशल मीडिया के असर के कारण
स्वाइप, स्किन और रिप्लेस… ये हम सोशल मीडिया के साथ करते हैं। अब यही आपसी रिश्तों में भी होने लगा है। जब हर चीज़ बहुत आसानी से अवेलेबल लगने लगे, तो पेशेंस कम हो जाता है। लोग सोचते हैं, ‘अगर यह नहीं समझ रहा, तो कोई और समझ लेगा।’ इस मानसिकता के चलते लोग रिपेयर करने की बजाय रिश्तों को रिप्लेस करने लगते हैं।
3. मेंटल हेल्थ अवेयरनेस को ओवर-सिंप्लिफाई करना

Cut-off culture की तीसरी बड़ी वजह है मेंटल हेल्थ अवेयरनेस मतलब को को छोटा कर देना। टॉक्सिक चीज़ों से दूर रहना ज़रूरी है, लेकिन यह समझना भी ज़रूरी है कि डिसकम्फर्ट को टॉक्सिसिटी नहीं कहा जा सकता है। हर बहस का मतलब अब्यूज़ करना नहीं है। हर गलतफ़हमी रेड फ्लैग नहीं होती है।
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4. कन्फ्रंटेशन के डर के कारण
सच यह है कि हम मुश्किल कन्वर्जेशन्स से बचना चाहते हैं। अपनी फीलिंग्स एक्सप्लेन करना, दूसरे की बात सुनना और बीच का सॉल्यूशन ढूंढना इमोशनल मैच्युरिटी मांगता है। Cut-off culutre इस एफर्ट से बचने का शॉर्टकट बन गया है। ‘मैं किसी को एक्सप्लेन क्यों करूं’ कहना आसान है, पर हर बार बिना बात किए दूर हो जाना हीलिंग नहीं है, ये कन्फ्रंटेशन से भागना होता है।
Cut-off culture को फॉलो करना आसान है, लेकिन सोचिए उन रिश्तों का क्या जिन्हें आप लंबे समय से सींचा है? अगर आप हर्ट हैं, तो उसे कहकर गलतफहमी को दूर करना चाहिए, न रिश्तों को खत्म करना चाहिए।
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