क्या आप अचानक थका हुआ महसूस करती हैं? वजन बिना किसी वजह के बढ़ या घट रहा है? बाल झड़ रहे हैं और पीरियड्स भी अनियमित हो गए हैं? तो एक बार थायरॉइड की जांच ज़रूर करवाएं। क्योंकि थायरॉइड की समस्या ऐसे ही शुरू होती है और ज़्यादातर महिलाएं इन्हें नज़रअंदाज़ कर देती हैं।
अमेरिकन थायरॉइड एसोसिएशन के मुताबिक, हर आठ में से एक महिला अपनी जिंदगी में कभी न कभी थायरॉइड की समस्या से गुजरती है। और जो बात और भी चौंकाने वाली है, वो ये है कि 60% से ज्यादा मरीजों को पता ही नहीं होता कि उन्हें थायरॉइड है।
थायरॉइड की समस्या से क्यों ज़्यादा परेशान रहती हैं महिलाएं?

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कई रिसर्च कहती हैं कि इसके पीछे ऑटोइम्यून रिस्पॉन्स बड़ा कारण है। यानी जब शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही सेल्स पर हमला करने लगता है। महिलाओं में ऑटोइम्यून बीमारियां पुरुषों के मुकाबले चार गुना ज्यादा होती हैं।
थायरॉइड होने की वजहें क्या हैं?
किसी एक कारण को थायरॉइड की समस्या का ज़िम्मेदार नहीं माना जा सकता है। इसके पीछे कई चीज़ें मिलकर काम करती हैं:
- जेनेटिक्स के कारण थायरॉइड हो सकता है।
- महिलाओं के शरीर में हार्मोन लगातार बदलते रहते हैं, खासकर प्रेग्नेंसी, पीरियड्स और मेनोपॉज के दौरान।
- हाशिमोटो एक ऑटोइम्यून कंडीशन है जिसमें इम्यून सिस्टम थायरॉइड ग्लैंड पर ही हमला करने लगता है, जिससे हाइपोथायरॉइडिज्म हो जाता है।
- लगातार स्ट्रेस में रहने से शरीर के हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है और थायरॉइड पर असर पड़ता है।
- अगर खाने में आयोडीन कम है, तो थायरॉइड ग्लैंड ठीक से काम नहीं कर पाती।
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थायरॉइड की समस्या से बॉडी कैसे प्रभावित होती है?

T3 और T4 नाम के हार्मोन थायरॉइड बनाते हैं, जो मेटाबॉलिज्म और पूरे शरीर की सेहत को कंट्रोल करते हैं। जब ये गड़बड़ाते हैं तो असर कई जगह दिखता है:
- कभी बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग, कभी पीरियड्स आते ही नहीं, या बिल्कुल अनियमित हो जाते हैं।
- थायरॉइड एग क्वालिटी और ओव्यूलेशन को प्रभावित करता है। अगर यही खराब है, तो प्रेग्नेंसी में दिक्कत आती है।
- थायरॉइड की समस्या से हाई ब्लड प्रेशर, जेस्टेशनल डायबिटीज या प्रीमैच्योर डिलीवरी जैसी कंडीशन्स हो सकती हैं।
- मेनोपॉज समय से पहले आ सकता है। इससे मूड स्विंग, गर्मी लगना और थकान जैसे लक्षण दिखते हैं।
- हाइपोथायरॉइडिज्म में वजन बढ़ता है, जबकि हाइपरथायरॉइडिज्म में घटता है, और इसे कंट्रोल करना बहुत मुश्किल लगता है।
- छोटे-छोटे काम भी भारी लगने लगते हैं, एनर्जी जैसे गायब हो जाती है।
- त्वचा रूखी हो जाती है, बाल झड़ते हैं और नाखून कमजोर पड़ जाते हैं।
- हाइपरथायरॉइडिज्म में दिल की धड़कन तेज हो सकती है और अनियमित हो सकती है।
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इन लक्षणों को बिल्कुल न करें इग्नोर
अगर आपको नीचे दी गई कोई भी समस्या लंबे समय से हो रही है, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें:
- वजन अचानक बढ़ना या घटना, हमेशा थकान और कमजोरी होना।
- पीरियड्स का अनियमित होना, त्वचा का रूखा पड़ना और बालों का झड़ना।
- बेवजह घबराहट या चिंता, हाथ-पैर का कांपना, बहुत पसीना आना और गर्मी या सर्दी बहुत ज़्यादा लगना।
थायरॉइड की समस्या गंभीर हो सकती है, लेकिन अगर समय पर इसका पता चल जाए और इलाज शुरू हो जाए, तो इसे पूरी तरह काबू में रखा जा सकता है।
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