पीरियड्स एक-आधा दिन आगे पीछे होने में कोई बड़ी बात नहीं है। ऐसा हो सकता है कि आपकी मेंस्ट्रुएशन साइकिल किसी महीने 10 तारीख को शुरू हो और किसी महीने 12 या 14 को। हालांकि, लगातार पीरियड्स में देरी होना परेशान कर सकता है।
अगर आप प्रेग्नेंट नहीं हैं, तो हो सकता है इसके दूसरे कारण हों, जिनपर गौर करना ज़रूरी है। आइए इस लेख में जानते हैं कि लेट पीरियड्स कब मुश्किल का सबब बन सकते हैं? साथ ही, इसके कारण भी जान लें।
पीरियड्स में देरी होना कितना सही है?

एक नॉर्मल मेंस्ट्रुएशन साइकिल 21 से 35 दिनों के बीच होती है। यानी अगर आपकी साइकिल 28 दिनों की है और पीरियड्स 2-3 दिन लेट आ रहा है, तो यह बहुत नॉर्मल माना जा सकता है। लेकिन अगर पीरियड्स 7 दिन या उससे ज़्यादा लेट हो जाएं, तो इसे देरी माना जाता है।
अगर तीन या उससे ज़्यादा महीनों तक पीरियड्स न आएं, तो इसे मेडिकल भाषा में एमेनोरिया (Amenorrhea) कहते हैं। इस कंडीशन में डॉक्टर से संपर्क करना ज़रूरी है। हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए अपने खुद की साइकिल को समझना आवश्यक है।
पीरियड्स में देरी होने के 6 बड़े कारण
1. तनाव (Stress)
तनाव शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ा देता है, जो सीधे तौर पर पीरियड्स पर असर डालता है। किसी भी इमोशनल इंसिडेंट के बाद पीरियड्स में देरी होना काफी आम बात है। मन और शरीर का गहरा रिश्ता होता है और ब्रेन सेक्स हार्मोन्स को रेगुलेट करने वाले हाइपोथैलेमस को प्रभावित कर सकता है।
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2. वजन में बदलाव (Weight Changes)
बहुत तेजी से वजन घटना या बढ़ने के कारण भी पीरियड्स में देरी हो सकती है। कम वजन होने पर शरीर में एस्ट्रोजन की कमी हो जाती है, जिससे पीरियड्स रुक सकते हैं। वहीं, ज़्यादा वजन बढ़ने से भी हार्मोनल इम्बैलेंस होता है। क्रैश डाइटिंग या ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज भी इसका कारण बन सकती है।
3. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)

PCOS आजकल महिलाओं में बहुत आम समस्या बन चुकी है। इसमें ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं, जो हार्मोन्स को असंतुलित कर देते हैं। इससे ओव्यूलेशन सही तरह नहीं हो पाता और पीरियड्स में देरी हो जाती है या कई महीनों तक पीरियड्स आते ही नहीं। अनियमित पीरियड्स, चेहरे पर बाल आना और वजन बढ़ना PCOS के सामान्य लक्षण हैं।
4. थायरॉइड की समस्या (Thyroid Issues)
थायरॉइड ग्लैंड शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करती है और इसका सीधा असर मेंस्ट्रुएशन पर भी पड़ता है। हाइपोथायरॉडिज्म (थायरॉइड कम एक्टिव होना) और हाइपरथायरॉडिज्म (थायरॉइड ज़्यादा एक्टिव होना) दोनों ही पीरियड्स को अनियमित कर सकते हैं। थकान, बालों का झड़ना और वजन में बदलाव थायरॉइड के दूसरे साइन्स हो सकते हैं।
5. दवाइयां और गर्भनिरोधक (Medications & Contraceptives)
कुछ दवाइयां जैसे एंटीडिप्रेसेंट, एंटीसाइकोटिक, या कीमोथेरेपी दवाएं पीरियड्स पर असर डाल सकती हैं। इसके अलावा, गर्भनिरोधक गोलियां बंद करने के बाद कुछ महीनों तक पीरियड्स अनियमित रह सकते हैं। इंट्रायूटेरिन डिवाइस (IUD) भी कभी-कभी पीरियड्स को प्रभावित करती है। इसलिए, कभी आपन इन मेडिकेशन से गुजरी हैं, तो पीरियड्स में देरी होना आम हो जाता है।
6. प्रीमेनोपॉज (Perimenopause)
40 साल की उम्र के आसपास या इससे पहले भी कुछ महिलाओं में प्रीमेनोपॉज शुरू हो सकता है। इस दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के लेवल में उतार-चढ़ाव आता है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। कभी कम तो कभी ज़्यादा ब्लीडिंग, या महीनों तक पीरियड्स का न आना इसके साइन हो सकते हैं।
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डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

जैसा कि हमने बताया पीरियड्स में देरी होना आम है और हर बार आपको डॉक्टर के पास दौड़ने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन कुछ कंडीशन्स ऐसी हैं जिनमें देर नहीं करनी चाहिए।
आपको डॉक्टर के पास जाने से पहले इन साइन्स पर ध्यान देना चाहिए-
- आप प्रेग्नेंट नहीं हैं और फिर भी अगर पीरियड्स 3 या उससे ज़्यादा महीनों से न आए हों।
- पीरियड्स के साथ बहुत तेज दर्द, बुखार या अबनॉर्मल डिस्चार्ज हो।
- अचानक बहुत ज़्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग होने लगे।
- थकान बहुत ज़्यादा हो, बालों का झड़ना या अचानक वजन बदलने जैसे लक्षण दिखें, तो भी डॉक्टर के पास जाएं।
- 16 साल तक की उम्र में भी पीरियड्स शुरू न हुए हों।
याद रखें, पीरियड्स से जुड़ी कोई भी परेशानी को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अपने शरीर को समझें, साइकिल ट्रैक करें और ज़रूरत पड़ने पर बिना झिझक डॉक्टर से मिलें।
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