आज भी मेरे घर में मेरी तारीफ की जाती है इस बात को लेकर कि कैसे में बचपन से सब कुछ खुद हैंडल कर रही हूं। मैं हमेशा से ही ज़िम्मेदार बेटी रही हूं और मुझे अच्छा लगता था जब मुझे लोग समझदार कहते थे। मगर कब बड़ी बेटी होना एक बोझ-सा बन गया मुझे पता नहीं चला। 20 साल बाद जब मेरी थेरेपिस्ट ने बताया कि मैं Eldest Daughter Syndrome से गुजर रही हूं, तो बात समझ में आने लगी।

मुझे यकीन है कि इस सिंड्रोम से कई लड़कियां गुजर रही होंगी। यह शायद हर बड़ी बेटी की ज़िंदगी की कहानी है। इस सिंड्रोम के साइन्स को हम अक्सर नजरअंदाज करते हैं। यह धीरे-धीरे हमारे रिश्तों पर असर डालने लगता है। कई लड़कियों को इसके बारे में पता भी नहीं है, तो चलिए आज इस आर्टिकल में हम इस सिंड्रोम के बारे में विस्तार से जानें।

Eldest Daughter Syndrome क्या है?

what do you mean by eldest daughter syndromeImage Source

आसान शब्दों में कहूं तो ये वो कंडीशन है जब घर की सबसे बड़ी बेटी को इतनी जिम्मेदारियां दे दी जाती हैं कि वो एक तीसरी पेरेंट बन जाती है। यह एक एक्सपीरियंस है जो करोड़ों बड़ी बेटियां जीती हैं। सीनियर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बर्मी बताती हैं, “बड़ी बेटियों पर परिवार और समाज दोनों की अपेक्षाएं ज़्यादा होती हैं। उन्हें बचपन से ही लीडर और देखभाल करने वाली की भूमिका में धकेल दिया जाता है।”

सबसे बड़ी बात यह है कि ये सब बचपन में ही शुरू हो जाता है, जब हम चीज़ों को लेकर सजग हो जाते हैं। हम खुद ही सारी जिम्मेदारियों को पूरा करने की ड्यूटी ले लेते हैं।

ये हैं Eldest Daughter Syndrome के Signs-

सब कुछ परफेक्ट चाहिए

अगर घर का सामान इधर से उधर हो जाए, तो क्या आप भी पैनिक करने लगती हैं? घर साफ रहना चाहिए, सभी को उनकी चीज़ें समय पर मिलनी चाहिए, किसी को कोई दिक्कत न हो… ये सब अपनी जिम्मेदारी लगती है। ऐसे में अगर कुछ गलत हो जाए, तो लगता है कि हम फेल हो गए।

“ना” बोलना नहीं आता

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एक समय था जब मैं किसी चीज़ के लिए लोगों को मना नहीं कर पाती थी। कजिन्स को किसी चीज़े के लिए टोकना या मना करने में हिचकिचाहट होती थी। चाहे मेरे पास समय हो या न हो, एनर्जी हो या न हो लेकिन मैं कभी ना नहीं बोल पाती थी।

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रिश्तों में हमेशा संभालने वाली बनना

आज भी अगर मेरे दोस्त लड़ रहे हों, तो मुझे लगता है कि मुझे उनके बीच के झगड़े को सुलझाना चाहिए। घर में मनमुटाव हो, तो मैं आगे आकर बात करती थी। मुझे लगता था कि रिश्ते को संभालना मेरा काम है। अगर आप भी ऐसा सोचती हैं, तो यह भी Eldest Daughter Syndrome का साइन है।

खुद पर होने लगते हैं Doubts

जब मैंने थेरेपी शुरू की, तो पहली बार समझ आया कि बचपन की ये आदतें मेरे रिश्तों को कैसे खराब कर रही थीं। डॉ. बर्मी समझाती हैं, “बड़ी बेटियों को बराबरी के रिश्ते में रहना मुश्किल लगता है क्योंकि वे देखभाल करने वाली भूमिका में कम्फर्टेबल फील करती हैं।”

मेरे साथ भी यही था। अगर कोई डेट अच्छी नहीं गई, तो मैं सोचती कि मेरी ही गलती होगी। अगर कोई रिश्ता नहीं बना, तो मैंने एफर्ट्स नहीं दिए। मुझे लगता था कि मुझे और मेहनत करनी चाहिए थी।

Eldest Daughter Syndrome को कंट्रोल करने के तरीके-

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1. रिश्तों को इम्तिहान मत समझो

मैं हर नए इंसान से मिलने को एक टेस्ट समझती थी जिसे पास करना ज़रूरी है। मेरी थेरेपिस्ट ने कहा, “ये सोचना बंद करो कि तुम्हें किसी को इंप्रेस करना है। सोचो कि क्या वो इंसान तुम्हें पसंद आ रहा है?” ये बात मेरे लिए बहुत बड़ी थी। जब मैंने खुद को साबित करना बंद किया। डॉ. बर्मी कहती हैं, “गलतियां करने की इजाज़त देना और अपनी ज़रूरतों को पहली जगह देना बहुत बड़ा बदलाव लाता है।”

2. दूसरों की फीलिंग्स को कंट्रोल करना छोड़ो

मेरी थेरेपिस्ट ने बताया कि सही और सच्चा बॉन्ड कंट्रोल से नहीं, कमजोरी दिखाने से आता है।” जब मैंने ये स्वीकार किया कि सब लोग अधूरे हैं और मैं सब कुछ ठीक नहीं रख सकती, तब असली रिश्ते बनने लगे। अपनी एचीवमेंट्स पर सीमाएं तय करना आना चाहिए, ताकि बिना गिल्ट के आप अपने लिए समय निकाल सकें।

3. सबको खुश करना बंद करो

मैंने कितनी बार अपने पार्टनर के लिए उन चीज़ों को त्यागा, जो मुझे पसंद थी। मुझे लगता था कि दूसरों को खुश रखना मेरी रिस्पॉन्सिबिलिटी है, लेकिन ऐसा नहीं है। “हम जैसी बड़ी बेटियों को समझना चाहिए कि वे भी मदद और सपोर्ट पाने की हकदार हैं।’ मेरी थेरेपिसस्ट ने मुझे बताया कि मेरी अपनी खुशी और ज़रूरते भी कितनी इंपॉर्टेंट हैं।

Eldest Daughter Syndrome से उबरने में मुझे भी समय लगा। आज भी कभी-कभी पुरानी आदतें वापस आ जाती हैं, लेकिन अब मुझे पता है कि मैं अपनी ज़िंदगी जी सकती हूं बिना गिल्ट महसूस किए।

अगर आप भी बड़ी बेटी हैं और ये सब महसूस करती हैं, तो याद रखें कि आप अकेली नहीं हैं। आपको अपनी ज़रूरतों को पहली जगह देने का पूरा हक है!

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