जब मुझे पीरियड्स होते हैं, तो अक्सर मेरा पेट फूलता है, गैस बनने के साथ-साथ पेट टाइट होने लगता है। मुझे यकीन है कि ऐसा आपके साथ भी होता होगा। पीरियड्स में मूड स्विंग्स ही नहीं होता, बल्कि उसके अलावा कई सारी दिक्कतें होती हैं। मगर पीरियड्स में ब्लोटिंग होना आम है।
क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? क्यों हमारा पेट उन दिनों में गुब्बारे की तरह फूल जाता है और गैस का तो पूछो ही मत! पीरियड्स के दौरान हार्मोनल इम्बैलेंस के बारे में तो सभी को पता है। चलिए आज जानते हैं कि क्या यह समस्या भी इसी कारण से होती है?
पीरियड्स में ब्लोटिंग क्यों होती है?

अब पीरियड्स के दौरान हमारे शरीर में काफी बदलाव होते हैं। ऐसे में प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन नाम के हार्मोन्स का लेवल ऊपर-नीचे होता है। पीरियड्स से पहले हमारे शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ एस्ट्रोजन हमारी आंतों में हवा और गैस को फंसा देता है। जब गैस फंसी रहती है, तो पेट फूला हुआ महसूस होता है और बेचैनी होती है। इसके साथ ही, कब्ज की समस्या भी हो सकती है, क्योंकि आंतें ठीक से काम नहीं कर पातीं।
वहीं, पीरियड्स शुरू होने से ठीक पहले यूट्रस की लाइनिंग में मौजूद सेल्स प्रोस्टाग्लैंडिन बनाती हैं। ये फैटी एसिड होते हैं जो हार्मोन्स की तरह काम करते हैं। इनका काम यूट्रस को श्रिंक करना होता है, ताकि हर महीने उसकी लाइनिंग बाहर निकल सके।
अब अगर शरीर में ज़रूरत से ज़्यादा प्रोस्टाग्लैंडिन बन जाएं, तो ये आपके खून में घुल जाते हैं। फिर ये शरीर की दूसरी स्मूद मसल्स को भी सिकोड़ने लगते हैं, जिसमें आंतों की मसल्स भी शामिल हैं।
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खाने-पीने की आदतें बढ़ाती हैं पीरियड्स में ब्लोटिंग
पीरियड्स के दौरान हमें मीठा खाने, नमकीन चीज़े खाने का मन करता है। यह क्रेविंग्स भी हार्मोन्स की वजह से होती हैं। जब हम ज़्यादा नमक खाते हैं, तो शरीर में पानी और ज़्यादा रुकता है। इसे वॉटर रिटेंशन कहते हैं। साथ ही, मीठी और तली-भुनी चीज़ें खाने से गैस बनती है। इसलिए, खाने की ये आदतें भी ब्लोटिंग बढ़ा देती हैं।
पीरियड्स में ब्लोटिंग से राहत पाने के हैक्स-

ब्लोटिंग को पूरी तरह से रोकना मुश्किल है, लेकिन कुछ आसान उपायों से वॉटर रिटेंशन को कम ज़रूर किया जा सकता है-
- जितना हो सके, उतना पानी पिएं। जी हां, पानी पीने से किडनी अच्छे से काम करती है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं।
- रिफाइंड कार्ब्स खाने से शुगर का लेवल बढ़ता है, जिससे किडनी ज़्यादा सोडियम को रोकने लगती है। सोडियम से वॉटर रिटेंशन होता है, इसलिए नमक और रिफाइंड कार्ब्स का सेवन लिमिटेड होना चाहिए।
- पोटैशियम सोडियम लेवल को बैलेंस करता है और ब्लोटिंग से लड़ने में मदद करता है। पालक जैसी हरी सब्जियां, शकरकंद, केला, एवोकाडो और टमाटर खाएं।
- राजमा, छोले जैसी दालें, गोभी जैसी सब्जियां, मसालेदार खाना और तली-भुनी चीज़ें गैस बनाती हैं। इन्हें कम खाने से आराम मिलता है।
- पीरियड्स के दौरान एक्टिव रहना मुश्किल होता है पर लाइट एक्सरसाइज करने से डाइजेशन सुधरता है। इससे पेट की गैस आसानी से बाहर निकलती है।
- जब हार्मोनल बदलाव से तनाव होता है, तो इससे डाइजेशन पर असर पड़ता है। स्ट्रेस कम करने के लिए मेडिटेशन या योगा करें।
- थोड़ी-थोड़ी देर में छोटे मील खाने से शरीर को खाना डाइजेस्ट करना आसान हो जाता है। इससे गैस कम बनती है और ब्लोटिंग कम होती है।
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पीरियड्स में ब्लोटिंग, गैस और पेट की परेशानी होना बिल्कुल नॉर्मल है। हर महिला को यह होता है। बस छोटे-छोटे बदलाव करके आप इस परेशानी को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
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