कुछ लोगों को सीजनल एलर्जी होती है। ऐसे लोग अक्सर स्प्रिंग सीजन में छींक-छीककर परेशान हो जाते हैं। इस दौरान आंखों से पानी आना और गले में खराश होना भी बेहद आम है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि बसंत ऋतु में हवा में पोलन बहुत ज़्यादा होते हैं। इसके अलावा, डस्ट और मोल्ड से भी छींकें आती है। क्या आपको पता है कि सीजनल एलर्जी से बचाव के लिए कई ऐसे तरीके हैं, जो आपके काम आ सकते हैं।
इस दौरान अक्सर लोग दवाइयों के सहारे रहते हैं। ये दवाइयां छींकें तो रोक देती है, लेकिन आपकी इम्युनिटी को प्रभावित करती है। दवाइयों के बगैर एलर्जी से राहत कैसे पा सकते हैं, यह हम आपको इस लेख में बताएंगे।
स्प्रिंग में एलर्जी क्यों होती है?
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बसंत ऋतु में नए फूल खिलते हैं और इसी दौरान हवा में पोलन यानी पराग कणों की मात्रा बहुत बढ़ जाती है। जब ये छोटे-छोटे कण हमारी नाक, आंखों या गले में जाते हैं, तो शरीर की इम्यून सिस्टम इन्हें हानिकारक समझकर रिएक्ट करने लगता है। इसी वजह से छींकें, नाक बहना, आंखों में खुजली और गले में खराश जैसी समस्याएं होती हैं।
इसके अलावा, स्प्रिंग सीजन में धूल के कण और मोल्ड स्पोर्स भी हवा में अधिक मात्रा में फैलते हैं। जिन लोगों को पहले से एलर्जी की समस्या है, उन्हें इस सीजन में ज़्यादा तकलीफ होती है, इसलिए ज़रूरी है कि समय रहते सही उपाय अपनाए जाएं।
सीजनल एलर्जी से बचाव के लिए आजमाएं ये तरीके-
दिन में एक बार भाप ज़रूर लें
सीजनल एलर्जी से बचाव के लिए यह सबसे प्रभावी तरीका है। कोशिश करें कि दिन में एक बार भाप ज़रूर लें, ताकि पोलन से होने वाली एलर्जी के लक्षणों में कमी आ सके।
- गर्म पानी में तुलसी, अजवाइन या नीलगिरी का तेल मिलाकर भाप लेने से बंद नाक खुल जाती है।
- भाप लेने से साइनस में जमा बलगम भी बाहर निकलता है और सांस लेने में आसानी होती है।
बेडशीट्स और कपड़ों को नियमित रूप से बदलें
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स्प्रिंग सीजन में डस्ट और पोलन कपड़ों पर भी चिपक जाते हैं। इसके अलावा, कई एलर्जेंस भी जमा हो जाते हैं इसलिए-
- नियमित रूप से बेडशीट्स, तकिए के कवर और कंबल धोएं।
- हफ्ते में कम से कम एक बार गर्म पानी में डिसइंफैक्टेंट डालकर इन्हें धोएं।
- बाहर से आने के बाद अपने कपड़े तुरंत बदलें और हाथ-पैर अच्छे से धोएं।
सीजनल एलर्जी से बचाव के लिए मास्क ज़रूर पहनें
पोलन आपके मुंह और नाक के ज़रिए आपके शरीर में घुसते हैं और फिर इम्युनिटी को अटैक करते हैं, इसलिए
- जब भी बाहर निकलें तो एंटी-पोलन या डस्ट मास्क ज़रूर पहनें। इनमें एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर होता है, जो एलर्जी के लिए खासतौर पर डिजाइन किया जाता है।
- एक अच्छा मास्क कई घंटों तक आपको सेफ रखता है, जिससे आप बेफिक्र होकर अपने काम कर सकते हैं।
- जब तेज हवा चल रही हो, तो पोलन बहुत ज़्यादा उड़ते हैं। ऐसे में बाहर निकलना हो तो मास्क ज़रूरी है।
- डिस्पोजेबल मास्क को रोज बदलें। कपड़े के मास्क को हर दिन गर्म पानी से धोएं और धूप में सुखाएं।
एयर कंडीशनर ऑन रखें
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एयर कंडीशनर हवा को फिल्टर भी करता है। इससे हवा के डस्ट पार्टिकल्स को कम किया जा सकता है।
- खिड़कियां बंद रखकर एसी चलाएं, खासकर सुबह और शाम के समय जब पोलन की मात्रा अधिक होती है।
- एसी के फिल्टर को भी हर वीक साफ करके यूज़ करें।
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सीजनल एलर्जी से बचाव के लिए रात को नहाना बेहतर
आप दिन भर बाहर रहते हैं, तो धूल-मिट्टी और एलर्जेंस शरीर पर चिपक जाते हैं, ऐसे में-
- रात को सोने से पहले गुनगुने पानी से नहाएं।
- गुनगुने पानी से शरीर की थकान भी मिटेगी और डस्ट या दूसरे एलर्जेंस धुल जाते हैं।
सीजनल एलर्जी से बचाव के लिए इन सरल उपायों को अपनाकर आप स्प्रिंग सीजन का आनंद ले सकते हैं। दवाइयों पर निर्भर रहने की बजाय इन तरीकों को अपनाएं और स्वस्थ रहें।
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