होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, ये अलग-अलग स्वाद का भी जश्न है। गुजिया, दही भल्ले, मालपुए के बीच एक ऐसा पारंपरिक फ्लेवर भी है जो हल्की खटास, मसालेदार खुशबू और देसी अंदाज़ से दिल जीत लेता है। वो कांजी वड़ा है।
राजस्थान और उत्तर भारत में खास तौर पर होली पर बनने वाली यह डिश सिर्फ एक रेसिपी नहीं, बल्कि एक परंपरा है। सरसों के पानी में भीगे नरम वड़े और उसकी हल्की-सी खटास…आपके मूड को रिफ्रेश करने के लिए काफी है।
कांजी वड़ा असल में फर्मेंटेड ड्रिंक और स्नैक का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है। इसे 2-3 दिन पहले तैयार किया जाता है, ताकि पानी में अच्छी तरह खमीर उठ जाए। इसे बनाना आसान है, इसलिए हमने सोचा कि आपके साथ 3 अलग-अलग तरह की रेसिपीज शेयर करेंगे। आइए जानते हैं कि कांजी वड़ा कैसे बनाना है?
1. पारंपरिक राजस्थानी कांजी वड़ा
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सामग्री-
- 1 कप धुली मूंग दाल
- 4 कप पानी
- 1 बड़ा चम्मच पीली सरसों (दरदरी पिसी हुई)
- 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- 1/2 छोटा चम्मच हल्दी
- 1 छोटा चम्मच काला नमक
- नमक स्वादानुसार
- तलने के लिए तेल
बनाने की विधि-
- मूंग दाल को 4-5 घंटे भिगोकर बारीक पीस लें।
- पेस्ट को अच्छी तरह फेंटें और छोटे-छोटे वड़े बनाकर तेल में सुनहरे तल लें।
- एक बड़े कांच के बर्तन में पानी लें, उसमें सरसों, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और काला नमक मिलाएं।
- तले हुए वड़ों को हल्का निचोड़कर इस पानी में डाल दें।
- बर्तन को ढककर 2-3 दिन धूप में रखें ताकि पानी में खमीर उठ जाए।
- जब पानी खट्टा और मसालेदार लगने लगे, तब आपका पारंपरिक कांजी वड़ा तैयार है!
2. गाजर वाली कांजी वड़ा
यह वर्ज़न खासतौर पर उत्तर भारत में काफी लोकप्रिय है। इसमें गाजर का हल्का मीठा स्वाद खटास को बैलेंस करता है।
सामग्री-
- 1 कप मूंग दाल
- 1 कप काली गाजर (लंबी कटी हुई)
- 1 बड़ा चम्मच राई पाउडर
- 1/2 छोटा चम्मच हींग
- 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- नमक स्वादानुसार
बनाने की विधि-
- मूंग दाल के वड़े पहले तरीके से तैयार कर लें।
- पानी में राई पाउडर, नमक, लाल मिर्च और हींग मिलाएं।
- इसमें कटी हुई काली गाजर डालें।
- वड़े डालकर 3-4 दिन के लिए धूप में रखें।
- गाजर के साथ फर्मेंट हुआ कांजी वड़ा और भी ज्यादा स्वादिष्ट लगता है।
3. उड़द दाल कांजी वड़ा
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अगर आप थोड़ा हैवी, रिच और गहराई वाला स्वाद पसंद करते हैं, तो उड़द दाल का कांजी वड़ा आपके लिए परफेक्ट ऑप्शन है। मूंग दाल के मुकाबले उड़द दाल के वड़े ज्यादा सॉफ्ट, फूले हुए और अंदर से हल्के स्पंजी बनते हैं।
सामग्री-
- 1 कप उड़द दाल
- 1 छोटा चम्मच अदरक पेस्ट
- 1 हरी मिर्च (बारीक कटी)
- 1 बड़ा चम्मच दरदरी सरसों
- 1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला
- नमक स्वादानुसार
बनाने की विधि-
- उड़द दाल को भिगोकर पीस लें और उसमें अदरक व हरी मिर्च मिलाएं। छोटे वड़े तल लें।
- मसालेदार सरसों के पानी में वड़े डालें।
- 2-3 दिन धूप में रखकर फर्मेंट होने दें।
- इसका स्वाद थोड़ा गाढ़ा और टेक्सचर ज्यादा सॉफ्ट होता है।
कांजी वड़ा बनाते हुए इन बातों का रखें ध्यान
- कांजी हमेशा कांच या मिट्टी के बर्तन में ही बनाएं। स्टील या प्लास्टिक के बर्तन में फर्मेंटेशन का स्वाद बदल सकता है। कांच का जार धूप में रखने के लिए भी सबसे बेहतर होता है।
- कांजी का असली स्वाद सरसों से आता है। कोशिश करें कि पीली या काली सरसों को ताज़ा दरदरा पीसें। बहुत महीन पाउडर न बनाएं, वरना पानी कड़वा हो सकता है।
- अच्छी फर्मेंटेशन के लिए बर्तन को 2-3 दिन तक हल्की धूप में रखें। रोज़ एक बार साफ चम्मच से पानी को हिलाएं ताकि मसाले अच्छी तरह मिलते रहें और खमीर समान रूप से उठे।
- तले हुए वड़ों को कांजी में डालने से पहले हल्का-सा निचोड़ लें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए। इससे पानी ज्यादा साफ और स्वाद संतुलित रहेगा। अगर वड़े बहुत सख्त हैं, तो उन्हें हल्के गुनगुने पानी में डुबोकर नरम कर लें।
- कांजी में नमक थोड़ा कम रखें क्योंकि फर्मेंट होने के बाद खटास और नमक थोड़ा ज़्यादा लगता है। साथ ही, लाल मिर्च और हींग का बैलेंस भी ज़रूरी है।
बस इन छोटी-छोटी बातों को ध्यान रखें और इस पर होली पर गुजिया के साथ कांजी वड़ा भी तैयार करें। यकीनन यह आपके मेहमानों को बहुत पसंद आएगा।
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