“शादी कब कर रही हो?” यह सवाल सुनते-सुनते हम सब परेशान हो गए हैं ना? लेकिन अब लड़कियां इस सवाल का जवाब देने की जगह अपनी जिंदगी जी रही हैं। महिलाओं में बढ़ता सिंगल ट्रेंड लोगों की परेशानी का सबब बन गया है। मुझे भी, तमाम हम उम्र लड़कियों की तरह, लगता था कि 26-27 साल की उम्र में मेरी शादी हो जाएगी। लेकिन अब, 30+ की उम्र में मुझे लगता है कि सिंगल रहने में कोई हर्ज नहीं है।

आपको पता है 2022 में NSO और MoSPI ने डेटा शेयर किया था। उसमें बताया गया था कि हमारे देश में Unmarried महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2011 में जहां 13.5% महिलाएं अविवाहित थीं, वहीं 2021 तक यह बढ़कर 19.9% हो गया था।

यह दिखाता है कि अब पहले की तुलना में ज़्यादा महिलाएं शादी न करने या शादी को टालने का फैसला ले रही हैं। वहीं, मॉर्गन स्टेनली जैसी नामी कंपनी ने भी फोरकास्ट किया था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका में 2030 तक 25 से 44 साल की लगभग आधी महिलाएं सिंगल होंगी। हां भई हां, आधी! और यह कोई दुखद बात नहीं, बल्कि एक नया चैप्टर है जो खुद लड़कियां लिख रही हैं।

यह एक इंटरेस्टिंग सवाल भी है जो कई लोगों के जहन में उतरता है, जब वह एक खुशमिजाज सिंगल लड़की को अपनी जिंदगी जीते हुए देखते हैं। अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि आखिर क्यों ऐसा हो रहा है, तो उसके लिए यह आर्टिकल जरूर पढ़ें। हमने कुछ स्टडीज के अलावा Happiness Studio की फाउंडर और सीनियर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बर्मी से बात करके ‘महिलाओं में बढ़ता सिंगल ट्रेंड’ के पीछे की वजहें जानी हैं।

अपनी कमाई, अपनी मर्जी

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सबसे पहली बात तो यही है कि आज की लड़कियां फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट हैं। वे पढ़ाई कर रही हैं, नौकरी कर रही हैं, अपना काम शुरू कर रही हैं और अकेले विदेश भी जा रही हैं। जब खुद का घर हो, अच्छी तनख्वाह हो, तो शादी करने की ‘जरूरत’ क्यों पड़े? पहले शादी को ‘सेफ्टी’ की तरह देखा जाता था और अब वो बस एक ऑप्शन है।

डॉ. बर्मी का कहना है कि दशकों तक महिलाएं डर की वजह से रिश्तों में बनी रहती थीं। उन्हें लगता था कि कहीं वे Undesirable न लगें। उन्हें Financial Unstability और सोशल जजमेंट का डर रहता था, लेकिन अब जब महिलाओं के पास फाइनेंशियल फ्रीडम है, तो वे अक्सर खुद से पूछती हैं: “क्या यह रिश्ता सच में मेरी जिंदगी बेहतर बना रहा है?”

अब लड़कियों को लगता है कि यार, पहले मैं अपना करियर बना लूं, दुनिया देखूं, खुद को जानूं, फिर देखेंगे शादी-वादी। और सच में, क्या गलत है इसमें?

समझौता करने वाला दौर कर दिया है खत्म

हमारी मम्मियों का जमाना था, जहां कहा जाता था, “थोड़ा समझौता तो करना पड़ता है ना”। लेकिन 2025 में कौन समझौता करेगा? फिर सवाल यह भी है कि आज भी सिर्फ लड़कियां ही क्यों समझौता कर रही हैं? आज की लड़कियों को पता है उन्हें क्या चाहिए। वे समझौता करने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन वे बराबरी वाला साथी चाहती हैं।

डेटिंग वेबसाइट Bumble की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि 64% महिलाएं अब पहले से ज़्यादा क्लीयर हैं कि उन्हें अपने पार्टनर से क्या चाहिए और किस बात पर वे किसी भी हालत में समझौता नहीं करेंगी।
वे अपनी ज़रूरतों और लिमिट्स को लेकर ज़्यादा आत्मविश्वासी हो गई हैं। लेकिन हकीकत यह है कि ऐसे मैच या पार्टनर मिलना आसान नहीं हैं।

कई रिसर्च भी बताती हैं कि रिश्तों में ज़्यादातर इमोशनल लेबर भी महिलाएं ही करती हैं, जैसे किसी की जरूरतें समझना, झगड़े संभालना और स्ट्रेस मैनेज करना। यह बहुत थका देने वाला होता है। इसलिए, कई महिलाएं सोचती हैं कि यह एनर्जी अगर वे खुद पर लगाएं, तो ज़्यादा अच्छा है।

मिलने वालों की कमी नहीं, पर सही कहां है?

आजकल तो मिलने-मिलाने के बहुत तरीके हैं- ऐप्स हैं, सोशल मीडिया है। ऑप्शन्स तो बहुत हैं, लेकिन किसी से खास कनेक्शन बन नहीं पाता है। इसके साथ ही, रिलेशनशिप्स में सीरियसनेस ही नहीं रही है। आज Situationship, Breadcrumbing, Benching, जैसे शब्दों ने रिश्तों को बेहद कमजोर कर दिया है। कमिटमेंट के नाम पर बातें सुन-सुनकर लड़कियां अब थक चुकी हैं। यही एक बड़ा कारण है महिलाओं में बढ़ता सिंगल ट्रेंड का।

लड़कियां सीख गई हैं सेल्फ-लव की कीमत

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पहले की पीढ़ी में सेल्फ-लव जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं थी। लड़कियों से हमेशा खुद से पहले दूसरों के बारे में सोचने और करने के लिए कहा जाता था, मगर अब वे खुद की इम्पॉर्टेंस को भी समझ रही हैं। अपनी मेंटल हेल्थ पर ध्यान दे रही हैं।लड़कियां समझ गई हैं कि अकेले रहने का मतलब अकेलापन नहीं, बल्कि स्वतंत्र रूप से खुश रहना है।

डॉ. बर्मी इसे और भी डिटेल से समझाती हैं, “खुश रहने के लिए इंसान को तीन चीजों की जरूरत होती है और वे आजादी, योग्यता महसूस होना और मीनिंगफुल रिश्ते हैं। आज की महिलाएं ये तीनों चीजें करियर, दोस्ती और अपने गोल्स से भी पा रही हैं, सिर्फ रोमांटिक रिश्तों से नहीं। वे रिलेशनशिप को नहीं, बल्कि उस दबाव और रोक-टोक को मना कर रही हैं जो उनकी आजादी छीन लेता है।”

खराब रिश्ते आपको मेंटली तोड़ देते हैं। उनके कारण आप स्ट्रेस और डिप्रेशन में जा सकते हैं। आपका कॉन्फिडेंस कम हो सकता है। इसलिए, अकेले रहना अब एक हेल्दी ऑप्शन भी हो गया है।

महिलाओं में बढ़ता सिंगल ट्रेंड कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है। आज की लड़कियां अपने विचारों को लेकर क्लीयर हैं। ये उनका तरीका है खुद को खुश रखकर अच्छा जीवन जीने का। एक अच्छी लाइफ पाने के लिए बस अब उन्हें किसी और पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं हैे।

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