तेज़ धूप बार-बार त्वचा पर लगे, तो सिर्फ टैनिंग ही नहीं करती, बल्कि कई अन्य दिक्कतें भी देती हैं। यही कारण है कि एक्सपर्ट्स सनस्क्रीन लगाने की सलाह देते हैं। हालांकि, कई महिलाएं सोचती हैं कि जब धूप नहीं है, तब सनस्क्रीन लगाने की क्या ज़रूरत? मगर क्या आपको पता है कि जब सूरज न दिख रहा हो, तब भी त्वचा को यूवी रेज़ से बचाना ज़रूरी है?
जी हां, बादल सूरज की गर्मी को तो कम कर देते हैं, लेकिन उसकी हानिकारक किरणों को नहीं। इसी वजह से cloudy days पर भी सनस्क्रीन उतनी ही ज़रूरी होती है, जितनी तेज़ धूप वाले दिनों में। चलिए इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानते हैं कि क्लाउडी दिनों में सनस्क्रीन क्यों ज़रूरी है?
UV Rays से कैसे बचाती है सनस्क्रीन?
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सनस्क्रीन आपकी स्किन और सूरज की हानिकारक किरणों के बीच एक प्रोटेक्टिव शील्ड की तरह काम करती है। सूरज से निकलने वाली दो मुख्य किरणें- UVA और UVB, स्किन को नुकसान पहुंचाती हैं। यह इन किरणों को या तो ब्लॉक करती है या एब्ज़ॉर्ब करके स्किन तक पहुंचने से रोकती है।
- UVA rays: ये स्किन की गहराई तक जाती हैं और समय से पहले झुर्रियां, फाइन लाइंस और एजिंग का कारण बनती हैं।
- UVB rays: ये स्किन की ऊपरी सतह को नुकसान पहुंचाकर टैनिंग, सनबर्न और रेडनेस पैदा करती हैं।
Cloudy Days पर भी सनस्क्रीन क्यों ज़रूरी है?
यह जानकर आप हैरान हो सकती हैं कि लगभग 80% UV rays बादलों को पार कर लेती हैं। मतलब, भले ही सूरज आपको दिखाई न दे, लेकिन उसकी किरणें आपकी स्किन तक पहुंच रही होती हैं। इससे-
- धीरे-धीरे टैनिंग और पिग्मेंटेशन बढ़ता है।
- स्किन डल और अनइवन दिखने लगती है।
- फाइन लाइंस और एजिंग तेज़ हो सकती है।
लंबे समय में स्किन डैमेज और स्किन कैंसर का रिस्क भी बढ़ सकता है। इसलिए, सनस्क्रीन सिर्फ धूप से बचने के लिए नहीं, बल्कि स्किन हेल्थ को लॉन्ग टर्म में सुरक्षित रखने के लिए ज़रूरी है।
कितनी SPF वाला Sun Protection है अच्छा?
- रोज़ाना इस्तेमाल के लिए SPF 30 काफी होता है।
- अगर आप ज़्यादा देर बाहर रहती हैं, तो SPF 50 बेहतर है।
- चेहरे और गर्दन के लिए लगभग दो उंगलियों जितनी सनस्क्रीन लगाना सही माना जाता है।
- अगर आप बाहर जा रहे हैं, तो इसे कम से कम 15-20 मिनट पहले लगाएं।
- हर 2-3 घंटे में दोबारा लगाएं, खासकर अगर पसीना आता है या चेहरा धोया है।
स्किन टाइप के हिसाब से चुने सनस्क्रीन
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हर स्किन अलग होती है, इसलिए हर सनस्क्रीन सबके लिए एक तरह से काम नहीं करती। गलत प्रोडक्ट यूज किया जाए, तो ब्रेकआउट्स होने लगते हैं। कोशिश करें कि आप अपनी स्किन टाइप के हिसाब से सन ब्लॉक क्रीम लें।
सेंसिटिव स्किन
- अगर आपकी स्किन जल्दी रिएक्ट करती है, तो मिनरल सनसक्रीन चुनें, जिसमें जिंक ऑक्साइड या टाइटेनियम डायऑक्साइड हो।
- फ्रेगरेंस-फ्री या हाइपोएलर्जेनिक फॉर्मुला होना चाहिए।
- एलोवेरा जैसे सूदिंग इंग्रीडिएंट्स हों।
कॉम्बिनेशन स्किन
- कॉम्बिनेशन स्किन टाइप में टी-ज़ोन ऑयली रहता है और बाकी एरिया ड्राई। ऐसे में लाइट-वेट और नॉन-ग्रीज़ी सनस्क्रीन लें।
- जेल-बेस्ड या फ्लूइड टेक्सचर जो ज़ल्दी एब्सॉर्ब हो जाए।
- मिनरल और केमिकल फिल्टर्स का मिक्स बैलेंस हो।
ऑयली स्किन
- ऑयली स्किन में पिंपल्स ज़ल्दी होते हैं। ऐसे में ऑयल-फ्री और नॉन-कोमेडोजेनिक फॉर्मूला हो।
- मैट फिनिश या जेल-बेस्ड सनस्क्रीन यूज़ करें।
- वॉटर-रजिस्टेंस हो।
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ड्राई स्किन
- ड्राई स्किन को प्रोटेक्शन के साथ हाइड्रेशन भी चाहिए होती है. इसलिए क्रीम वाला लोशन चुनें।
- ह्यालुरॉनिक एसिड, सिरेमाइड्स, ग्लिसरीन, आदि जैसे मॉइश्चराइजिंग इंग्रीडिएंट्स हों।
- एल्कोहल-बेस्ड या मैट फॉर्मूला अवॉइड करें।
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