क्या आपने कभी गौर किया है कि आप शारीरिक रूप से कम और मानसिक रूप से ज्यादा थक जाती हैं? आपने दिन भर में शायद बहुत ज्यादा भागदौड़ नहीं की, जिम भी नहीं गई, कोई भारी काम भी नहीं किया, फिर भी रात को बिस्तर पर लेटते ही ऐसा लगता है जैसे दिमाग की बैटरी पूरी तरह खत्म हो गई हो? महिलाओं में मानसिक थकान अक्सर देखी जाती है।
कई महिलाएं यही महसूस करती हैं। शरीर ठीक है, लेकिन मन बिल्कुल थका हुआ है। आंखें बंद करना चाहती हैं, लेकिन दिमाग है कि रुकने का नाम ही नहीं लेता। दिमाग हर वक्त कुछ न कुछ सोचता रहता है। आपको पता है यही असली वजह है कि आप मानसिक रूप से खाली महसूस करती हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे कौन-से कारण हैं?
मेंटल लोड क्या होता है?

मेंटल लोड यानी वो सारी जिम्मेदारियां जो दिखती नहीं हैं, लेकिन दिमाग में हमेशा चलती रहती हैं। महिलाओं में मानसिक थकान का यह सबसे बड़ा कारण है। घर का काम करना अलग बात है, लेकिन यह सोचते रहना कि कौन-सा काम कब करना है, किसकी जरूरत क्या है, क्या याद रखना है?- यही मेंटल लोड है। यह ठीक वैसे ही है जैसे फोन में कोई ऐप बंद किए बिना पीछे चलती रहे और धीरे-धीरे बैटरी खत्म करती रहे।
महिलाओं में मानसिक थकान ज्यादा क्यों होती है?
इस पर कई अध्ययन हो चुके हैं जो यह साफ बताते हैं कि महिलाओं का मेंटल लोड पुरुषों से कहीं ज्यादा होता है। University of Melbourne की एक स्टडी में पाया गया कि जो महिलाएं घर और बाहर दोनों जगहों पर काम करती हैं, वे ज्यादा mentally tired होती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे हर काम की प्लानिंग और देख-रेख भी खुद ही संभालती हैं।
इसी तरह फ्रांस में Sociologie du Travail Journal में छपी एक रिसर्च में यह बात सामने आई कि घर की पूरी व्यवस्था देखने की जिम्मेदारी लगभग पूरी तरह महिलाओं पर होती है, जो उन्हें काफी ज्यादा एग्जॉस्ट कर देता है।
इन कारणों से होती है महिलाओं में मानसिक थकान-
1. मल्टीटास्किंग और मेंटल लोड

महिलाएं एक साथ कई काम करती हैं। घर की प्लानिंग से लेकर बच्चों की देखभाल और बाहर के काम तक वे संभालती हैं। यह कोई स्टीरियोटाइप नहीं, बल्कि रिसर्च से साबित हुई बात है। इतने सारे काम एक साथ चलने से दिमाग पर Cognitive Overload आता है। यानी दिमाग के ज्यादा हिस्से एक साथ काम करने लगते हैं, खासकर प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स जो प्लानिंग करता है और लिम्बिक सिस्टम जो फीलिंग्स को संभालता है।
इसे सरल भाषा में ऐसे समझें- जैसे कंप्यूटर में 15 टैब एक साथ खुले हों तो प्रोसेसर गर्म हो जाता है और धीमा पड़ जाता है। महिलाओं के दिमाग के साथ भी यही होता है। कई सारे कामों की प्लानिंग एक साथ करने से महिलाओं में मानसिक थकान अक्सर बढ़ जाती है।
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2. इमोशनल प्रोसेसिंग
नींद के दौरान एक खास फेज होता है जिसे REM कहते हैं। इसमें दिमाग दिनभर की भावनाओं और यादों को छांटता है। महिलाएं इस फेज में ज्यादा वक्त बिताती हैं क्योंकि वो दिन भर ज्यादा इमोशनल चीजें सोचती रहती हैं, जैसे- “मैंने गलत तो नहीं कहा?”, “कल क्या होगा?”, “उसने ऐसे क्यों कहा?” आदि।
दिलचस्प बात यह है कि पुरुषों की नींद ज्यादा आराम वाली होती है, जबकि महिलाओं का दिमाग नींद में भी फीलिंग्स को प्रोसेस करता रहता है। यही वजह है कि दिमाग को शांत होने में ज्यादा वक्त लगता है।
3. हार्मोन्स
पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज़ सिर्फ फिजिकल एक्टिविटी नहीं हैं। ये एक्टिविटीज मूड, चिंता और नींद को सीधे प्रभावित करती हैं। क्या आपको पता है कि पीरियड से 3-5 दिन पहले प्रोजेस्टेरोन घटने से नींद की क्वालिटी खराब हो जाती है। मेनोपॉज़ में एस्ट्रोजन कम होने से हीट स्ट्रोक्स, चिंता और इनसोम्निया आम हो जाते हैं।
हॉर्मोन्स का सीधा असर सेरोटोनिन, डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर पर पड़ता है और जब इनका संतुलन बिगड़ता है तो दिमाग बंद होने का नाम नहीं लेता। महिलाओं में मानसिक थकान बार-बार रात में जागने से होती है, जो दिमाग के लगातार चलने से होता है।
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महिलाओं में मानसिक थकान ऐसे हो सकती है कम-

- रात को सोने से पहले 10 मिनट एक डायरी में वो सब लिख दें जो मन में चल रहा है। रिसर्च बताती है कि इससे दिमाग के उस हिस्से की एक्टिविटी कम होती है जो बार-बार एक ही बात सोचता रहता है।
- इसके अलावा, 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक आजमाएं। 4 सेकंड सांस लें, 7 सेकंड रोकें, 8 सेकंड में धीरे-धीरे छोड़ें। यह तकनीक नर्वस सिस्टम को शांत करती है और तनाव के हॉर्मोन कोर्टिसोल को कम करने में मदद करती है।
- किसी करीबी से या थेरेपिस्ट से बात करें। ऐसा करना सिर्फ मन हल्का नहीं करता है, बल्कि इमोशनल और मेंटल बैगेज को कम करता है।
देखा आपने महिलाओं में मानसिक थकान के कितने सारे कारण हैं! कोशिश करें कि आप खुलकर जिएं। सारी जिम्मेदारियां खुद के सिर पर न लें। अपने मन को शांत होने का मौका दें।
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