जब एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने 8 घंटे की शिफ्ट की डिमांड की थी, तो इंडस्ट्री के गलियारों में हलचल मच गई थी। हमने अक्सर सुना है कि स्टार्स 16-17 घंटे काम करते हैं। ऐसे में जब दीपिका जैसी बड़ी स्टार ने मां बनने के बाद यह डिमांड रखी थी, तो इससे एक बड़ी बहस छिड़ गई थी। कई सेलिब्रिटीज ने दीपिका की डिमांड का सपोर्ट भी किया। अब इस लिस्ट में अभिनेत्री राधिका आप्टे भी शामिल हो गई हैं।
राधिका आप्टे और दिव्येंदु शर्मा अपनी फिल्म ‘साली मोहब्बत’ के प्रमोशन के लिए All About Eve के गेस्ट बने। After Hours के पॉडकास्ट में होस्ट बानी जी आनंद के साथ उन्होंने कई टॉपिक्स पर बात की। इसी बातचीत में राधिका आप्टे ने वर्किंग आवर्स पर भी बेबाकी से अपने विचार रखे।
“हमारे Work Ethics हैं खराब”…

सबसे पहले, राधिका ने वर्क कल्चर पर बात की। उन्होंने कहा कि लोग यहां बहुत मेहनत करते हैं। यह अच्छी बात है। हालांकि, यहां का वर्क एथिक बहुत खराब है। वर्किंग आवर्स फिक्स नहीं हैं। इसी तरह वीकली ऑफ्स का भी अता-पता नहीं हैं। इसलिए किसी को अपने लिए समय ही नहीं मिलता।
राधिका आप्टे ने दीपिका पादुकोण की डिमांड को सराहा
दीपिका पादुकोण का साथ देने वाली राधिका भी 8-घंटे की शिफ्ट को सही ठहराती हैं। वह कहती हैं, “मैं बहुत खुश हूं कि दीपिका इस बारे में बात कर रही हैं। क्योंकि उनकी बातों को सुना जाएगा।”
इस पर आगे बात करते हुए राधिका ने अपना अनुभव भी शेयर किया। जब उनकी बेटी तीन महीने की थी, तब वे कुछ फिल्मों में काम कर रही थीं। लेकिन फिर उन्हें लगा कि वह ऐसे काम नहीं कर सकती हैं। वह कहती हैं, “मैंने तय किया कि अगर मुझे काम करना है तो सिर्फ 12 घंटे के लिए, जिसमें मेरा ट्रैवल, हेयर और मेकअप सब शामिल होगा। मुझे 12 घंटे के लिए बाहर रहना होगा, वरना मैं यह नहीं कर सकती।”
मदर्स के लिए स्ट्रगलिंग है वर्क कल्चर
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राधिका ने इस विषय में अपने दोस्तों से भी बात की और उन्हें पता लगा कि कितनी मदर्स इसके चलते लंबे समय तक काम नहीं कर पाती हैं, क्योंकि उनके पास कोई ऑप्शन नहीं होता।
वह कहती हैं, “मैंने जब अपने दोस्तों से बात की तब पता लगा कि कितनी मदर्स शुरुआत के 2-4 साल काम ही नहीं कर पाती हैं। वही है कि बच्चे को रोज सेट पर ले जाना भी पॉसिबल नहीं है और पिता ऐसे में कई हफ्तों तक अपने बच्चे की शक्ल तक नहीं देख पाते।”
कॉर्पोरेट जॉब से कम नहीं है फिल्म मेकिंग
होस्ट बानी ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए बताया कि इस दीपिका की डिमांड को काफी लोगों ने नकारा भी। कई लोगों का मानना है कि फिल्म मेकिंग कॉर्पोरेट जॉब नहीं है, यह आर्ट है! लेकिन राधिका ने हंसते हुए इस बात को खारिज़ किया। उन्होंने कहा कि यह एक बिजनेस है।
“यह बेहद कॉर्पोरेट है। 12 या 14 घंटे की शिफ्ट में लोग बहुत समय बर्बाद करते हैं। अगर यह 8 घंटे की शिफ्ट होती तो शायद लोग फोकस करके तेजी से काम करते। यह उतना ही कॉर्पोरेट है जितना कॉर्पोरेट हो सकता है।” राधिका ने बेबाकी से जवाब देते हुए अपनी एक इंडिपेंडेंट फिल्म का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि कैसे इस फिल्म के लिए उन्होंने 8 घंटे की शिफ्ट में काम किया था और काम बेहतर ढंग से हुआ।
राधिका और दिव्येंदु ने इस बात पर भी जोर दिया कि स्टार्स एक प्रिविलिज्ड कैटेगरी में आते हैं। दोनों ने इस बातचीत में उस सच को छुआ, जिसे फिल्म इंडस्ट्री अक्सर चमक के पीछे छुपा देती है।
दोनों ने खुले तौर पर माना कि कलाकारों के पास एक खास तरह का विशेषाधिकार होता है, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि सेट पर हर किसी की ज़मीन एक जैसी नहीं होती।
फिल्म के सेट बराबरी की जगह नहीं हैं। वहाँ कुछ लोग बिना किसी चिंता के शूट कैंसिल कर सकते हैं और कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें उसी फैसले की कीमत अपने शरीर और दिमाग से चुकानी पड़ती है।
सिनेमा को लेकर दीवानगी अपनी जगह है, लेकिन ये बातचीत एक ज़रूरी बात याद दिलाती है कि कला से प्यार करना, खुद को खो देने की शर्त पर नहीं होना चाहिए। राधिका और दिव्येंदु की बातचीत को आप यहां देख सकते हैं-
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