बॉलीवुड ने हमे सिखाया है कि प्यार का मतलब ग्रैंड जेस्चर होता है। प्यार की परिभाषा है लाउड होना…जताना, मगर क्या वाकई प्यार इतना शोर करता है? ऐसा भी तो हो सकता है कि आपकी एंग्जायटी में कभी धीरे से कोई बस आपका हाथ थामे और कहे, “परेशान मत हो, सब हो ठीक हो जाएगा। मैं हूं ना तेरे साथ!”
प्यार की परिभाषा सबके के लिए अलग हो सकती है। लेकिन ‘इक तारा’, ‘मुझे मत रोको’, ‘जीते हैं चल’, आदि जैसे बेहतरीन गाने बॉलीवुड को देने वाली कविता सेठ के लिए प्यार का मतलब सरेंडर करना है।
सिंगर कविता सेठ ने हाल ही में हमारे पॉडकास्ट After Hours में शिरकत की थी। इस पॉडकास्ट में उन्होंने मदरहुड, म्यूजिक, अपनी जर्नी और प्यार के बारे में बड़ी खूबसूरत बातें कीं। सपोर्टिव पार्टनर और रियल लव के बारे में उन्होंने जो कहा, वो बॉलीवुड के फेयरीटेल नैरेटिव को पलट देता है।
प्यार का मतलब है सरेंडर करना…

जब कविता सेठ से पूछा गया कि उनके लिए प्यार का मतलब क्या है, उन्होंने बिना किसी झिझक कहा: “लव मींस सरेंडर… और नो एक्सपेक्टेशंस।” कविता कहती हैं कि जहां उम्मीदें शुरू होती हैं, प्यार वहीं से कमजोर पड़ने लगता है। क्योंकि, फिर आप उसी इंसान से कुछ लौटाने की उम्मीद करने लगते हैं और रिश्ता बस Give & Take में बदल जाता है। और अगर प्यार भी बाकी रिश्तों की तरह एक समझौता, एक लेन-देन हो गया, तो फिर उसमें खास बचा ही क्या?
कविता का मानना है कि जब प्यार भी बाकी रिश्तों की तरह एक लेन-देन में तब्दील होने लगे, तो उसमें से निस्वार्थ भाव खोने लगता है। सच्चा प्यार वही है जो बिना शर्त, बिना हिसाब-किताब और बिना किसी अपेक्षा के जिया जाए।
कितना जरूरी है सपोर्टिव पार्टनर का होना
कविता सेठ जब अपने पति के बारे में बात करती हैं, तो उनकी आवाज में एक गहरा ठहराव आता है। वो बताती हैं कि उनके पति ही वो शख्स थे जिन्होंने हर सपने में उनका हाथ पकड़ा। वह बताती हैं कि उनके हसबैंड उनके लिए भगवान थे और आज भी हैं। वह उनके ऐसे मेंटर थे, जिन्होंने हर राह पर कविता का साथ दिया। चाहे कोई भी ड्रीम कितना भी ‘इंपॉसिबल’ लगे, उनके साथी सिर्फ एक बात कहते थे- “हां हो जाएगा।”
यही भरोसा वो आज अपने बच्चों के लिए भी रिपीट करती हैं। आज के समय में, जब महिलाओं से एडजस्ट होने के लिए कहा जाता है, कविता ने बताया कि उन्हें कभी ऐसा नहीं करना पड़ा। यह संभव हुआ क्योंकि उनके पार्टनर बहुत सपोर्टिव थे।
वह कहती हैं, “हर टैलेंटेड, एंबिशियस और इंडिपेंडेंट लड़की को एक बहुत सपोर्टिव पार्टनर की जरूरत होती है। अगर पार्टनर सपोर्टिव न हो तो आप या तो टूट जाती हैं, या फिर रुकी रह जाती हैं।”
बॉलीवुड की फेयरीटेल स्टोरी बनाम असली प्यार
कविता सेठ की कहानी प्यार को एक अनकंडीशनल और स्प्रिचुअल स्पेस पर ले जाती है। उनकी कहानी यह साफ करती है कि प्यार ग्रैंड जेस्चर नहीं, ग्राउंडेड सपोर्ट है।
सबसे बढ़कर प्यार आपको अपनी जड़ों और अपने आसमान दोनों से जोड़ देने की हिम्मत रखता है। शायद इसलिए, आज जब फिल्मों के फेयरीटेल रिश्ते हमें डिल्यूजन की ओर ले जाते हैं, कविता सेठ जैसे लोगों की कहानियां हमें बताती हैं कि असली प्रेम हकीकत से बुना हुआ होता है।
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