भारत का इतिहास सिर्फ राजाओं और योद्धाओं की कहानियों से नहीं बना। महिलाओं के बनाए स्मारक भी इस देश की विरासत का एक अहम हिस्सा हैं, जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
आप इन जगहों पर घूम चुके होंगे, सेल्फी भी ली होगी, लेकिन शायद यह नहीं जानते होंगे कि इनके पीछे किसी पुरुष का नहीं, बल्कि एक मजबूत औरत का हाथ था। चलिए आज उन्हीं कहानियों से आपको रूबरू करवाते हैं और बताते हैं उन पॉपुलर मॉन्युमेंट्स के बारे में जिन्हें देश की वीरांगनाओं ने बनवाया था।
1. रानी की वाव, पाटन, गुजरात
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गुजरात के पाटन में मौजूद यह बावड़ी देखने में जितनी खूबसूरत है, इसकी कहानी उतनी ही भावुक करने वाली है। रानी उदयामति ने सन् 1063 में इसे अपने पति, सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम की याद में बनवाया था। यह सिर्फ एक कुआं नहीं, एक उल्टा मंदिर है जिसकी दीवारों पर बारीक नक्काशी आज भी लोगों को हैरान कर देती है।
कुछ समय बाद सरस्वती नदी की बाढ़ में यह बावड़ी मिट्टी में दब गई, लेकिन जब सालों बाद खुदाई हुई तो पता चला कि उस मिट्टी ने नक्काशी को और भी सुरक्षित रखा था। यूनेस्को ने 2014 में इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिया।
2. इतिमद-उद-दौला, आगरा
आगरा सुनते ही ताज महल याद आता है, लेकिन उससे पहले एक और खूबसूरत मकबरा था, जो एक बेटी ने अपने पिता के लिए बनवाया। नूरजहां ने 1622 से 1628 के बीच अपने पिता मीर गयास बेग की याद में यह मकबरा बनवाया, जो भारत में सफेद संगमरमर से बना पहला मकबरा है।
बगीचे के बीच यह इमारत किसी जड़े हुए ज्वेल बॉक्स जैसी लगती है। रंग-बिरंगे पत्थरों की जड़ाई, मूंगे और नाजुक कारीगरी इसे बेहद अलग और यूनिक रंग देते हैं। कहते हैं, इसी मकबरे से इंस्पायर होकर शाहजहां ने बाद में मुमताज के लिए ताज महल बनवाया था। महिलाओं के बनाए स्मारक में इस बेहद आकर्षक मॉन्युमेंट का ज़िक्र न हो, ऐसे कैसे हो सकता है?
3. हुमायूं का मकबरा, दिल्ली
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दिल्ली का हुमायूं का मकबरा तो आपने ज़रूर देखा होगा। क्या आपको पता है कि महिलाओं के बनाए स्मारक में से यह भी एक है? यह हाजी बेगम यानी हमीदा बानो बेगम ने 1565-72 के बीच अपने पति हुमायूं की याद में बनवाया था। यह भारत में फारसी और भारतीय वास्तुकला का पहला मिला-जुला नमूना है। यह ऐसी शैली थी, जो आगे चलकर मुगल आर्किटेक्चर की पहचान बन गई।
इस मकबरे में मुगल वंश के कई शासकों को दफनाया गया है। 1857 के विद्रोह के दौरान बहादुर शाह जफर ने भी तीन राजकुमारों के साथ यहीं शरण ली थी।
4. मिरजन किला, कर्नाटक
इतिहास के पन्नों में एक पुराना ज़िक्र इस तरह मिलता है कि मिर्जन किला 16वीं सदी में गेर्सोप्पा की रानी चेन्नाभैरादेवी ने बनवाया था। उस समय यह इलाका विजयनगर साम्राज्य के अधीन था। रानी चेन्नाभैरादेवी ने लगभग 54 साल तक राज किया और वे इसी किले में रहती भी थीं।
इसलिए, मिर्जन किला अक्सर महिलाओं के बनाए स्मारक के रूप में भी याद किया जाता है, क्योंकि इसे एक शक्तिशाली महिला शासक ने बनवाया और संभाला था।
उनके समय में मिर्जन का बंदरगाह, जो कारवार से करीब 32 किलोमीटर दूर है, बिजनेस के लिए काफी मशहूर था। यहां से काली मिर्च, साल्टपीटर (बारूद बनाने में काम आने वाले प्रोडक्ट्स) और सुपारी जहाज़ों के ज़रिए सूरत तक भेजी जाती थीं।
5. लाल दरवाजा मस्जिद, जौनपुर, उत्तर प्रदेश
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उत्तर प्रदेश के जौनपुर में एक ऐसी रानी हुई जिन्होंने न सिर्फ मस्जिद बनवाई, बल्कि लड़कियों के लिए पहला स्कूल भी खोला। बीबी राजे, सुल्तान महमूद शर्की की रानी, ने 1447 में लाल दरवाजा मस्जिद बनवाई।
बीबी राजे का एक मदरसा जामिया हुसैनिया आज भी मौजूद है। एक रानी का इस तरह समाज के लिए सोचना, उस दौर में यह बड़ी बात थी। जब भी महिलाओं के बनाए स्मारक की बात होगी, तो इस खूबसूरत मंदिर को नहीं भूला जा सकता।
6. दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता
हुगली नदी के किनारे बसा दक्षिणेश्वर काली मंदिर कोलकाता का अहम हिस्सा है। इसे 19वीं सदी में रानी रश्मोनि ने बनवाया था। मंदिर का आर्किटेक्चर बेहद खास है। इसमें बंगाली नवरत्न शैली का इस्तेमाल किया गया है। इस नौ शिखरों वाले मेन मंदिर के चारों तरफ छोटे-छोटे मंदिर हैं। इसमें मुगल आर्किटेक्चर की झलक भी दिखती है।
महिलाओं के बनाए स्मारक सिर्फ पत्थर और चूने की इमारतें नहीं हैं, इनमें प्यार है, श्रद्धा है और एक मजबूत इरादे की छाप है। अगर अगली बार आप इन मॉन्युमेंट्स को एक्सप्लोर करें, तो उनकी खूबसूरती पर फिर गौर ज़रूर कीजिएगा।
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