जब इश्क की बातें होती हैं, तो क्या आपके मन में भी प्यार भरे गीत गूंजने लगते हैं? बॉलीवुड की कई कहानियों में हमने प्यार के अलग-अलग रूप देखे। ज्यादातर फिल्मों में दिखाया कि प्यार वही सच्चा है, जिसमें दर्द है। बॉलीवुड की कई फिल्मों में हमने देखा है कि कैसे प्यार के नाम पर कंट्रोल और पज़ेसिवनेस को ‘ट्रू लव’ की पैकेजिंग में बेच दिया जाता है। Kabir Singh में “प्यार में गुस्सा चलता है” का नैरेटिव हो या Aashiqui 2 का “सेल्फ-डिस्ट्रक्टिव इश्क”, दर्शकों को ऐसा दिखाया गया जैसे प्यार तब तक सच्चा नहीं जब तक आप उसमें दर्द-ए-डिस्को न करने लगें ! मगर अफसोस यह है कि इसे ‘इमोशनल मैनिपुलेशन इन रिलेशनशिप्स’ कहा जाता है।
आप हालिया ओटीटी रिलीज Bhagwat: Raakshas को ही ले लीजिए। इसकी कहानी एक ऐसे मैनिपुलेटिव आदमी की है, जो लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाता है। वो ऐसा इंसान है जो ‘दिल से प्यार करता हूं’ बोलते-बोलते सामने वाले की आत्मा तक को थका देता है।
ऐसी कई कहानियां जो आपको बॉलीवुड में देखने को मिलेंगी। और ये कहानियां सिर्फ स्क्रीन पर ही नहीं, बल्कि हमारे आस-पास भी हैं। फर्क बस इतना है कि असल जिंदगी में यह इमोशनल मैनिपुलेशन लंबा चलता है, जिसकी शिकार अक्सर महिलाएं होती हैं।
1. महिलाएं क्यों बन जाती हैं इमोशनल मैनिपुलेशन का आसान निशाना?
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बढ़िया सवाल है और इसका आसान जवाब है, क्योंकि औरतें दिल से सोचती हैं! दिल से सोचना बेहद अच्छा है, लेकिन यह हमारे लिए ही तमाम असुरक्षाएं खड़ी कर देता है। हम महिलाएं रिश्तों में भरोसे, भावनाओं और जुड़ाव को अहमियत देती हैं। हम सोचते हैं कि प्यार समझ, इज़्ज़त और साथ का दूसरा नाम है, लेकिन मैनिपुलेटिव लोग इसी भरोसे को हथियार बना लेते हैं।
वे शुरू में बेहद परफेक्ट लगते हैं। आपको ‘स्पेशल’ फील कराते हैं, हर समय आपकी फिक्र करते हैं, आपके दुख-सुख में शामिल होते हैं। धीरे-धीरे वही ‘केयर’ कंट्रोल में बदलने लगती है। ऐसे में “मैं तुम्हारे बिना कुछ नहीं हूं,” जैसी बातें सुनकर आप सोचती हैं कि आपका पार्टनर आपको सच्चा प्यार करता है। पर असल में ये इमोशनल एंकरेजमेंट नहीं, इमोशनल कैप्टिविटी होती है।
2. मैनिपुलेशन की तीन घातक चालें आप भी समझिए
मैनिपुलेशन की तीन घातक चालें लव-बॉम्बिंग, गैसलाइटिंग और गिल्ट ट्रिपिंग है। लव-बॉम्बिंग के दौरान, रिश्ते की शुरुआत में आपका पार्टनर आपके लिए तारीफों के पुल बांध सकता है। वो आपको प्यार से इतना सराबोर कर देते हैं कि आपको लगता है आपको सोलमेट मिल गया है, लेकिन ऐसा नहीं होता।
गैसलाइटिंग मैनिपुलेशन का साइकोलॉजिकल हथियार है। क्या ऐसा कभी हुआ है कि आपने अपने पार्टनर से कुछ कहा हो और उन्होंने पलटकर कहा हो कि तुम ओवरथिंक कर रही हो? यही गैसलाइटिंग होती है। इस तरह से आपको अपनी फीलिंग्स से भरोसा कम होने लगता है।
वहीं, जब कोई आपको हर छोटी बात पर दोषी महसूस करवाने लगे, तो वह गिल्ट ट्रिपिंग होती है। अगर ऐसा हो रहा है, तो समझिए कि अब रिश्ता बराबरी से नहीं, गिल्ट के बैलेंस शीट पर चल रहा है। यह वो वक्त होता है जब प्यार की जगह डर और अपराधबोध ले लेते हैं।
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3. फिर इस ‘इमोशनल चक्रव्यूह’ से कैसे निकला जाए?
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सबसे पहला कदम यही है कि आप अपनी भावनाओं को गंभीरता से लें। अगर आपको किसी रिश्ते में बार-बार खुद पर शक होने लगे, तो इसे ओवरथिंकिंग मत समझिए। यह आपका इनर अलार्म सिस्टम है जो चेतावनी दे रहा है। इसलिए जरूरी है कि आप सीमाएं तय करें। समझने की कोशिश करें कि प्यार का मतलब किसी को अपनी पूरी दुनिया बना लेना नहीं होता। अगर कोई रिश्ता आपकी आज़ादी, दोस्तों या काम के रास्ते में रुकावट बन रहा है, तो वो रिश्ता इश्क नहीं, इन्वेज़न है।
साथ ही, सबसे जरूरी कदम है कि आप खुद को प्राथमिकता देना सीखिए। किसी को बचाने की जिम्मेदारी आपकी नहीं है। ध्यान रखें कि प्यार वहीं टिकता है जहां सम्मान हो। इमोशनल मैनिपुलेशन का सबसे बड़ा खतरा यही है कि वो प्यार जैसा दिखता है। वो मुस्कुराते हुए आपको तोड़ता है और केयर के बहाने आपका आत्मविश्वास छीन लेता है। पर असली प्यार वो है जो आपको और मजबूत बनाता है।
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