मेकअप सिर्फ़ प्रोडक्ट्स लगाने का नाम नहीं है, यह एक कला है। हर कला की तरह इसमें भी साइंस होती है। कलर थ्योरी वही सीक्रेट हथियार है, जो एक नॉर्मल लुक को स्टनिंग बना सकता है। अगर आप कलर्स के बेसिक रूल्स समझ लेती हैं, तो आप आसानी से शेड्स चूज़ कर सकती हैं। आप परफेक्ट मेकअप कॉम्बिनेशन के साथ अपने स्टाइल के हिसाब से कलर्स को मिक्स-मैच भी कर सकती हैं।
मगर सवाल है कि यह कलर थ्योरी क्या है? मेकअप के दौरान यह इतनी ज़रूरी क्यों है?
क्या है मेकअप में कलर थ्योरी की Importance?
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कलर करेक्शन
अगर आपको कलर थ्योरी के बारे में मालूम है और आप उसे यूज़ करना जानती हैं, तो मेकअप को फ्लॉलेस बना सकती हैं। इसके ज़रिए आप रेडनेस, डार्क सर्कल्स, पिग्मेंटेशन को आसानी से न्यूट्रलाइज कर सकती हैं।
स्किन टोन मैचिंग
क्या आपको पता है कि आपका स्किन टोन क्या है? वॉर्म, कूल और न्यूट्रल अंडरटोन्स को समझना बहुत ज़रूरी है। इससे आप मेकअप प्रोडक्ट्स को आसानी से चुन सकती हैं। इस तरह से प्रोडक्ट्स पैची नहीं लगते और एक नेचुरल फिनिश देते हैं।
आई मेकअप होता है बेहतर
अगर आप कलर थ्योरी को जान जाएं, तो आपके लिए आई कलर्स के साथ खेलना आसान हो जाता है। ऐसे में आप कॉम्प्लिमेंट्री कलर्स को चुनती हैं।
कलर थ्योरी में कलर कॉम्बिनेशन है ज़रूरी
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- पहले आते हैं प्राइमरी कलर्स जो दूसरे रंगों को मिक्स करके नहीं बनाए जा सकते हैं। इनमें तीन कलर आते हैं- रेड, येलो और ब्लू।
- सेकेंडरी कलर्स बनाने के लिए दो प्राइमरी कलर्स को बराबर मात्रा में मिलाया जाता है। इससे ऑरेंज , ग्रीन और वायलेट कलर्स बनाए जाते हैं।
- Tertiary कलर्स वो हैं जिन्हें प्राइमरी और सेकेंडरी कलर को मिलाकर बनाया जाता है। ये रेड-ऑरेंज, येलो-ऑरेंज, येलो-ग्रीन, ब्लू-ग्रीन, ब्लू-वायलेट और रेड-वॉयलेट हैं।
- तीन कलर्स जो कलर व्हील पर एक-दूसरे के पास होते हैं, उन्हें Analogue कलर्स कहते हैं। ये बहुत ही सटल लुक क्रिएट करते हैं।
- Monochromatic कलर्स यानी एक ही कलर के अलग-अलग शेड्स और टोन्स का यूज़ करना।
क्या है कलर कनेक्शन का मैजिक?
कलर करेक्शन का मतलब है ओपोज़िट शेड्स का इस्तेमाल करके स्किन डिसकलरेशन को न्यूट्रलाइज करना। ये करेक्टर्स क्रीमी कंसीलर जैसे टेक्सचर में होते हैं।
ग्रीन- रेडनेस को न्यूट्रलाइज करता है।
पीच/ऑरेंज- डार्क सर्कल्स को बैलेंस करता है। पीच लाइट से मीडियम स्किन टोन पर यूज़ होता है और ऑरेंज, मीडियम से डीप स्किन टोन के लिए इस्तेमाल होता है।
पर्पल- डल स्किन को ब्राइटन करता है और अनइवन टोन को बैलेंस करता है।
येलो- अंडर-आई डार्कनेस और स्पॉट्स को ब्लर करता है।
कलर थ्योरी के साथ कैसे क्रिएट करें फ्लॉलेस बेस?
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हर फ्लॉलेस मेकअप लुक का बेस आपकी स्किन होती है। अगर बेस सही नहीं होगा, तो बाकी मेकअप भी उतना सीमलेस नहीं लगेगा। यही कारण है कि कलर थ्योरी को समझना बहुत ज़रूरी है, ताकि आप अपनी स्किन के अंडरटोन के हिसाब से सही फाउंडेशन शेड चूज़ कर सकें।
अब स्किन के अंडरटोन्स की बात करें, तो वो तीन तरह के होते हैं- वॉर्म, कूल और न्यूट्रल। ये डिसाइड करते हैं कि कौन-सा फाउंडेशन शेड आपके कॉम्प्लेक्शन में नेचुरली ब्लेंड होगा। गलत अंडरटोन या गलत फाउंडेशन ब्रश यूज़ करने से फेस पैची लग सकता है।
आप अंडरटोन्स को ऐसे पहचान सकती हैं-
वॉर्म अंडरटोन्स
- अगर आपकी स्किन में येलो, पीच या गोल्डन शेड दिखते हैं, तो आपका अंडरटोन वॉर्म है।
- ऐसे में आपको फाउंडेशन शेड्स भी वॉर्म या गोल्डन लेबल के चूज़ करने चाहिए। ये शेड्स स्किन में आसानी से मेल्ट हो जाते हैं और नेचुरल ग्लो देते हैं।
कूल अंडरटोन्स
- अगर आपकी स्किन में पिंक, रेंड या थोड़ा ब्लू टिंट नज़र आता है, तो आपका अंडरटोन कूल है।
- ऐसे में आपको कूल अंडरटोन वाले फाउंडेशन शेड्स पिक करने चाहिए। ये आपकी स्किन को फ्रेश और एक समान लुक देते हैं।
- इससे मेकअप के बाद स्किन ग्रे या डल नज़र नहीं आती।
न्यूट्रल अंडरटोन्स
- अगर आपकी स्किन में वॉर्म और कूल टोन्स का बैलेंस्ड मिक्स है, तो आपका अंडरटोन न्यूट्रल है।
- न्यूट्रल अंडरटोन वाले लोग काफी रेंज के फाउंडेशन शेड्स कैरी कर सकते हैं, क्योंकि उनकी स्किन दोनों टोन्स के साथ एडजस्ट हो जाती है।
अगर आप कलर थ्योरी का ध्यान रखें, तो बेहतर ढंग से मेकअप कर सकती हैं। बिल्कुल वैसा जैसे कोई एक्सपीरियंस्ड आर्टिस्ट करता है। कलर थ्योरी के बारे में जानना रॉकेट साइंस नहीं है, बस थोड़ा-सा ऑब्जर्वेशन करेंगी, तो आप प्रो हो सकती हैं।
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