क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि जैकेट पहनने के बाद भी आपको ज़्यादा ठंड लगती है। आपके दोस्तों ने हल्के स्वेटर्स पहने हैं, लेकिन सॉक्स, कैप और जैकेट पहनने के बाद भी आपके हाथ-पैर ठंडे हैं। सिर्फ सर्दियों के मौसम में ही नहीं, बल्कि गर्मियों में भी कुछ लोगों को ज़रूरत से ज़्यादा ठंडा लगता है। इसे कोल्ड इनटॉलरेंस कहते हैं, क्या आपको पता है?
दरअसल, हमारा शरीर नॉर्मली 37°C का टेम्परेचर मेंटेन करने की कोशिश करता है, लेकिन ये नैचुरली 36.1°C से 37.2°C के बीच हो सकता है। यही कारण है कि कुछ लोगों को नैचुरली थोड़ा ज़्यादा कोल्ड फील होता है, लेकिन अगर आप हमेशा ठंडा फील कर रहे हैं, तो इसका मतलब हो सकता है कि आपका बॉडी टेम्परेचर मेंटेन करने में स्ट्रगल कर रहा है।
कोल्ड इनटॉलरेंस के 5 बड़े कारण
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1. खून की कमी
खून की कमी तब होती है जब आपकी बॉडी में हेल्दी ब्लड सेल्स ढंग से नहीं बन पाते हैं। ये सेल्स ऑक्सीजन को कैरी करते हैं। जब खून की कमी होती है, तो ऑटोमैटिक ऑक्सीजन लेवल भी कम हो जाता है, जिससे ज़्यादा कोल्ड फील होता है। ऐसे में आपके हाथ और पैर ज़्यादा ठंडे होते हैं और इससे कभी-कभी थकान भी बढ़ जाती है।
2. हाइपोथायरॉइिज़्म
यह कंडीशन तब होती है, जब थायरॉइड ग्लैंड पर्याप्त हार्मोन्स नहीं बना पाती। ये ग्लैंड मेटाबॉलिज़्म कंट्रोल करता है, यानी कैसे आपकी बॉडी खाने को एनर्जी और हीट में कन्वर्ट करती है। जब हार्मोन्स लो होते हैं, मेटाबॉलिज़्म स्लो हो जाता है। इससे वजन बढ़ता है, थकान लगती है और कोल्ड इनटॉलरेंस बढ़ जाता है।
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3. खराब ब्लड सर्कुलेशन के कारण
कोल्ड इनटॉलरेंस के पीछे खराब बल्ड सर्कुलेशन भी हो सकता है। अगर बल्ड सही ठंड से फ्लो नहीं कर रहा है, तो हाथ और पैर गर्म रखना मुश्किल हो जाता है। खराब ब्लड सर्कुलेशन के कारण अक्सर हाथ और पैरों के साथ-साथ नाक भी ठंडी रहती है।
4. लो बॉडी फैट या BMI के कारण
जब बॉडी फैट या BMI लो होता है, तो वॉर्म रहना मुश्किल हो जाता है। बॉडी फैट इंसुलेशन का करता है और आपको कोजी रखता है। ये उन लोगों में ज़्यादा देखा जाता है, जो नैचुरली स्लिम, सुपर एक्टिव या कम कैलोरीज लेते हैं।
5. डायबिटीज
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अगर किसी को लंबे समय से ब्लड शुगर की समस्या है, तो यह नर्व्स को डैमेज कर सकता है। इस डैमेज का असर ज़्यादातर हाथ और पैरों में नज़र आता है। इस वजह से टेम्परेचर का पता नहीं चलता और हाथ या पैर सुन्न हो जाते हैं फिर चाहे बॉडी टेम्परेचर नॉर्मल हो।
कोल्ड इनटॉलरेंस में उम्र, जेंडर और प्रेग्नेंसी का होता है बड़ा रोल
- बच्चे और बूढ़ें लोग ज़्यादा जल्दी कोल्ड फील करते हैं। बच्चों की बॉडी हीट मेंटेन नहीं कर पाती और बड़े-बूढ़े लोगों का मेटाबॉलिज़्म स्लो होता है और स्किन पतली हो जाती है। इससे हीट लॉस होता है और उन्हें ज़्यादा ठंड लगती है।
- हार्मोन्स और बॉडी कम्पोज़िशन के डिफरेंस की वजह से महिलाएं ज़्यादा ठंडा फील करती हैं।
- प्रेग्नेंट महिलाएं आमतौर पर वॉर्म फील करती हैं, लेकिन अगर प्रेग्नेंसी में भी आपके हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं, तो यह खून की कमी के कारण हो सकता है।
कोल्ड इनटॉलरेंस से बचने के नैचुरल तरीके-
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- हाई प्रोटीन, कॉम्प्लेक्स कार्ब्स या हेल्दी फैट्स वाले वॉर्म मील्स का सेवन करें। अपने खाने में अदरक या हल्की मिर्च शामिल कर सकते हैं। पानी अच्छे से पिएं, क्योंकि डिहाइड्रेशन बॉडी के टेम्परेचर के रेगुलेशन को अफेक्ट करता है।
- फिज़िकल एक्टिविटी ज़रूर करें। इससे ब्लड फ्लो बेहतर होगा और मसल मास बनेगा, जो हीट जनरेट और रिटेन करता है।
- सर्दियों में खासतौर से वूल के कपड़े पहनें। कॉटन या बाकी मटेरियल्स ठंड को रोक नहीं पाते हैं। अपने हाथ-पैरों को अच्छे से कवर करें।
हमें उम्मीद है कि आपको कोल्ड इनटॉलरेंस के बारे में अच्छी समझ मिली होगी। अगर आप सारी टेक्नीक आजमाने के बाद भी कोल्ड फील करती हैं, तो फिर डॉक्टर से संपर्क करें। कुछ ब्लड टेस्ट्स के ज़रिए वो अंडरलाइिंग कंडीशन के बारे में बता सकते हैं।
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