पैसे को लेकर हर किसी की सोच अलग होती है। कोई इसे खर्च करने की चीज़ मानता है, तो कोई इसे सेफ रखने और बढ़ाने का ज़रिया। दिलचस्प बात यह है कि साइकोलॉजी के कई रिसर्च बताती हैं कि महिलाएं और पुरुष पैसे को बिल्कुल अलग तरीके से देखते और मैनेज करते हैं। जी हां, जब मनी मैनेजमेंट की बात आती है, महिलाओं को पुरुषों से बेहतर माना जाता है।
कई स्टडीज़ में यह पाया गया है कि महिलाएं बजट बनाने, सेविंग करने और रिस्क को समझने में ज़्यादा सावधान होती हैं, जबकि पुरुष अक्सर ज़्यादा रिस्क लेने और जल्दी से इन्वेस्ट करने के बारे में सोचते हैं।
क्या वाकई महिलाएं मनी मैनेजमेंट अच्छे से कर पाती हैं, आइए अलग-अलग स्टडीज के ज़रिए जानें।
1. बजट बनाने में बेहतर होती हैं महिलाएं
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आपने अक्सर नोटिस किया होगा कि महिलाएं पैसे खर्च करने से पहले अक्सर सोचती हैं कि उसका लॉन्ग-टर्म असर क्या होगा। इसी वजह से वे मनी मैनेजमेंट और बजट बनाने में ज़्यादा disciplined मानी जाती हैं।
घर के खर्च से लेकर बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल इमरजेंसी या भविष्य की ज़रूरतों तक, महिलाएं आमतौर पर हर चीज़ को ध्यान में रखकर खर्च करती हैं। यही वजह है कि कई घरों में मनी मैनेजमेंट और फाइनेंशियल प्लानिंग की ज़िम्मेदारी महिलाओं को दी जाती है।
2. सेविंग ज़्यादा करती हैं महिलाएं
आपने देखा होगा कि कैसे हमारी मम्मियां अक्सर इधर-उधर एक्स्ट्रा खर्च के लिए पैसे रखती हैं। माना जाता है महिलाएं पैसे बचाने के मामले में पुरुषों से ज़्यादा सतर्क होती हैं। मजबूत मनी मैनेजमेंट के लिए वे अक्सर पहले सेविंग करती हैं और फिर खर्च के बारे में सोचती हैं।
इसके पीछे एक बड़ा कारण सेफ्टी की फीलिंग भी है। महिलाएं अक्सर uncertainties जैसे हेल्थ इश्यू, फैमिली रिस्पॉन्सिबिलिटी या इमरजेंसी को ध्यान में रखकर पैसा बचाती हैं। यही आदत उनकी स्किल्स को और मजबूत बनाती है।
3. सोच-समझकर इमोशनल मनी मैनेजमेंट करती हैं महिलाएं
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अक्सर यह कहा जाता है कि महिलाएं पैसे के मामले में काफी इमोशनल होती हैं। लेकिन कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह पूरी तरह नेगेटिव बात नहीं है। UC Berkeley की एक रिसर्च के अनुसार, महिलाएं इन्वेस्ट करने के मामले में पुरुषों की तुलना में ज़्यादा सोच-समझकर फैसले लेती हैं, जिससे उनका मनी मैनेजमेंट बैलेंस्ड होता है।
महिलाएं आमतौर पर खर्च करते समय यह भी सोचती हैं कि इससे परिवार या फ्यूचर पर क्या असर पड़ेगा। यानी उनका नज़रिया सिर्फ तुरंत फायदा नहीं बल्कि लॉन्ग-टर्म मनी मैनेजमेंट और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पर होता है।
4. कम ट्रेडिंग, लेकिन बेहतर मनी मैनेजमेंट
दिलचस्प बात यह है कि कई फाइनेंशियल स्टडीज़ में पाया गया है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम ट्रेडिंग करती हैं, लेकिन उनके निवेश का रिटर्न अक्सर ज़्यादा स्टेबल होता है।क्योंकि वे बार-बार इन्वेस्ट बदलने के बजाय धैर्य और लॉन्ग-टर्म की स्ट्रैटेजी पर भरोसा करती हैं। यही सोच उन्हें बेहतर मनी मैनेजमेंट करने में मदद करती है।
Warwick Business School की एक स्टडी में करीब 2,800 इन्वेस्टर्स के डेटा का एनालिसिस किया गया था। इसमें पता चला कि महिलाओं का रिटर्न पुरुषों के मुकाबले औसतन 1.8% ज़्यादा था।
असल सवाल शायद यह नहीं है कि महिलाएं पैसे संभालने में पुरुषों से बेहतर हैं या नहीं।
असल बात यह हो सकती है कि महिलाओं में अक्सर जो आदतें देखने को मिलती हैं, वही सफल मनी मैनेजमेंट की सबसे ज़रूरी खूबियां होती हैं।
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