कुछ लोगों को अक्सर एंग्जायटी अटैक्स आ जाते हैं। छोटी-छोटी बातों में घबराहट होने लगती है। ऐसे में एक्सपर्ट्स 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक आजमाने की सलाह देते हैं। माना जाता है यह मन को इंस्टेंटली शांत करने में मदद करती है।

अगर आप रोज़ाना इसकी प्रैक्टिस करें तो आपको लाइट फील होता है और पैनिक या एंग्जायटी की सिचुएशन में भी राहत मिलती है। इस आर्टिकल में चलिए आपको इस तकनीक के बारे में बताएं और यह भी जानें कि इसकी प्रैक्टिस कैसे करनी चाहिए?

क्या है 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक?

यह ग्राउंडिंग तकनीक एक साइकोलॉजिकल मेथड है जो आपको प्रेजेंट मोमेंट में वापस लाने में मदद करती है। जब एंग्जायटी या पैनिक अटैक होता है, तो हमारा दिमाग नेगेटिव थॉट्स में फंस जाता है। ऐसे में 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक आपको अपनी पांच इंद्रियों पर फोकस करवाकर रियलिटी से दोबारा जोड़ती है।

यह तकनीक बेहद सिंपल है और कहीं भी, कभी भी की जा सकती है। इसमें किसी खास इक्विपमेंट या ट्रेनिंग की ज़रूरत नहीं होती। बस कुछ मिनटों में ही आप अपने मन को शांत कर सकते हैं।

5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक कैसे करें?

जैसा कि हमने आपको बताया, यह एक्सरसाइज करना बेहद आसान है। आप स्टेप-बाय-स्टेप तरीके फॉलो करके इसे आज़मा सकते हैं-

5 चीज़ें देखें: सबसे पहले अपने आसपास नज़र दौड़ाएं और पांच चीज़ें खोजें जो आप देख सकते हैं। यह कुछ भी हो सकता है- दीवार पर लगी पेंटिंग, खिड़की से दिखता पेड़, टेबल पर रखा पेन, अपने हाथों की उंगलियां या कमरे में रखा फर्नीचर। हर चीज़ को ध्यान से देखें और अपने मन में उसका नाम लें।

4 चीज़ें छुएं: अब अपने आसपास की चार चीज़ों को छुएं और उनके टेक्सचर पर फोकस करें। अपने कपड़े का फैब्रिक, कुर्सी का आर्मरेस्ट, अपने बाल, घड़ी या फोन का सरफेस। ध्यान दें कि वह चीज़ कैसी लग रही है- सॉफ्ट है, हार्ड है, स्मूथ या रफ है।

3 चीज़ें सुनें: अपनी आंखें बंद करें या खुली रखें और तीन अलग-अलग आवाज़ों पर ध्यान दें। यह आपकी अपनी सांस की आवाज़ हो सकती है, बाहर से आती गाड़ियों की आवाज़, पंखे की आवाज़, पक्षियों की चहचहाहट या दूर से आती कोई भी साउंड हो सकती है।

2 चीज़ें सूंघें: अब दो अलग-अलग स्मेल्स पर फोकस करें। यह आपके परफ्यूम की खुशबू हो सकती है, कॉफी या चाय की महक, साबुन की खुशबू, या बस फ्रेश एयर की स्मेल। आप अपने कपड़ों को भी सूंघ सकते हैं।

1 चीज़ चखें: आखिर में कोई भी खाने की चीज़ को चखें। उसे धीरे-धीरे स्वाद लेकर खाएं, नहीं तो अपने मुंह में मौजूद टेस्ट पर फोकस करें, च्युइंग गम लें या पानी पिएं और उसके स्वाद को महसूस करें।

मन को शांत करने में कैसे मदद करती है यह तकनीक?

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5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक का साइंटिफिक बेस बहुत क्लियर है। जब आपको एंग्जायटी होती है, तो आपका दिमाग फाइट-ऑर-फ्लाइट मोड में चला जाता है। आप फ्यूचर के बारे में या पुरानी यादों में फंस जाते हैं। यह तकनीक आपका ध्यान वापस प्रेजेंट मोमेंट में लाती है।

जब आप अपने पांचों सेंसेज़ पर फोकस करते हैं, तो आपका ब्रेन रियल एनवायरनमेंट से जुड़ता है। यह नर्वस सिस्टम को सिग्नल भेजता है कि आप सेफ हैं और कोई डेंजर नहीं है। धीरे-धीरे हार्ट रेट कम होने लगती है, ब्रीदिंग नॉर्मल होने लगती है और पैनिक कम होने लगता है।

यह तकनीक माइंडफुलनेस का एक फॉर्म है जो आपको ओवरथिंकिंग से बाहर निकालती है। यह एक एंकर की तरह काम करती है जो आपको स्टेबल और ग्राउंडेड फील कराती है। रेगुलर प्रैक्टिस से आप सीख जाते हैं कि एंग्जायटी मोमेंट्स में अपने आप को कैसे शांत रहना है।

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कब करनी चाहिए 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक की प्रैक्टिस?

  • जब अचानक घबराहट बढ़ जाए या पैनिक अटैक आए, तो यह तकनीक आपको प्रेजेंट मोमेंट में वापस लाकर डिस्ट्रेस कम करने में मदद करती है।
  • किसी बड़ी मीटिंग, प्रेजेंटेशन या इंटरव्यू से पहले नर्वस हो रहे हैं? इस एक्सरसाइज से अपने आप को शांत कर सकते हैं।
  • जब बिजी शेड्यूल, मल्टीपल टास्क्स या बहुत सारी जिम्मेदारियों से दबाव लगे, तो कुछ मिनट निकालकर इस तकनीक को ट्राई करें। यह आपको फोकस और क्लैरिटी वापस देती है।
  • गुस्सा, दुख या फ्रस्ट्रेशन जैसी फील्स से डील कर रहे हैं? यह एक्सरसाइज आपको शांत होने और इम्पल्सिवली रिएक्ट करने से बचाने में मदद करती है।
  • लंबी लाइनों में या ट्रैफिक में फंसे हैं? 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक को कोपिंग स्ट्रेटेजी के रूप में यूज करें और बेचैनी या चिड़चिड़ाहट से निपटें।
  • अपनी बेडटाइम रूटीन में इसे शामिल करें। यह बेचैन दिमाग को शांत करके बेहतर नींद लाने में मदद करती है और दिनभर की टेंशन को रिलीज करती है।

इस 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक को अपनी डेली रूटीन में शामिल करें। सुबह उठते ही, ऑफिस में ब्रेक के दौरान या सोने से पहले इसे कर सकते हैं। यह न सिर्फ एंग्जायटी कम करती है, बल्कि ओवरऑल मेंटल वेलनेस भी इंप्रूव करती है।

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