हम सब अपनी ज़िंदगी में ऐसे दौर से कभी न कभी गुजरते हैं, जब दिमाग और दिल दोनों थक जाते हैं। यह थकान बाहर से दिखाई नहीं देती, क्योंकि यह शरीर की नहीं, मन की थकान होती है। जिम्मेदारियां, काम का दबाव, इमोशनल टर्मोइल और रोजमर्रा की छोटी-छोटी चुनौतियां धीरे-धीरे हमारे मेंटल स्पेस को भर देती हैं। लोगों को लगता है यह हल्की-फुल्की थकान है, जो थोड़ा आराम करके खत्म हो जाएगी। कई लोग तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन वास्तव में यह मेंटल एग्जॉशन के साइन्स हो सकते हैं।
इन साइन्स को नजरअंदाज़ करना आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डाल सकता है। आइए इस लेख में जानें कि मानसिक थकान क्या होती और उसके क्या लक्षण हैं, जिन्हें नजरअंदाज बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।
मेंटल एग्जॉशन क्या है?
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मेंटल एग्जॉशन एक ऐसी कंडीशन होती है, जिसमें लगातार स्ट्रेस, इमोशनल बर्डन और मानसिक दबाव मिलकर हमारे दिमाग को ओवरलोड कर देते हैं। यह सिर्फ कमजोरी या आलस नहीं होता, बल्कि एक साइकोलॉजिकल स्टेट है, जहां कॉग्निटिव रिसोर्स धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं। इससे हमारे काम करने की ऐबिलिटी भी कम हो जाती है।
मेंटल एग्जॉशन के साइन्स
1. हर समय थकान लगना
अगर आप काम शुरू करने से पहले ही थकान महसूस करती हैं या सुबह उठते ही दिमाग भारी लगता है, तो यह मेंटल एग्जॉशन का सबसे बड़ा साइन है। एक स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों में मानसिक थकान ज्यादा होती है, उनमें Recovery Response (ब्रेक लेने के बाद एनर्जी लौटना) बेहद धीमा होता है।
2. ध्यान न लगना और ब्रेन फॉग
जब दिमाग लगातार ओवरलोड रहता है, तो फोकस करना मुश्किल हो जाता है। आप छोटी-छोटी बातें भूलने लगती हैं, काम करते समय दिमाग जैसे ब्लॉक हो जाता है या एकदम खाली महसूस होता है। इसे ही ब्रेन फॉग कहा जाता है—जहां दिमाग सोच नहीं पाता और हर काम में ज्यादा समय लगने लगता है।
3. नींद आने में परेशानी या नींद के बाद भी थकान
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मेंटल एग्जॉशन का सबसे पहले असर आपकी नींद पर पड़ता है। रात में नींद आने में देर लगती है, बार-बार आंख खुल जाती है या सुबह उठकर भी मन और शरीर भारी लगता है। कई बार पर्याप्त नींद लेने के बाद भी ऐसा लगता है जैसे आराम मिला ही नहीं, यह मानसिक थकान का क्लियर साइन है।
4. जल्दी चिड़चिड़ापन होना या गुस्सा आना
जब मन थका हो, तो छोटी-छोटी बातें भी बड़ी लगने लगती हैं। मूड बार-बार बदलता है, बिना वजह चिड़चिड़ापन आता है या अचानक रोने का मन करता है। यह सब आपके मन का तरीका है बताने का कि वह ओवरलोड हो चुका है और उसे अब आराम की जरूरत है।
5. सोशल इंटरैक्शन से बचना
मेंटल एग्जॉशन में व्यक्ति अक्सर लोगों से दूरी बनाने लगता है। दोस्तों से बात करने का मन नहीं करता, बाहर जाने का मन नहीं करता या ज्यादा बातचीत थकाने लगती है। दिमाग बस शांत रहना चाहता है और कोई भी अतिरिक्त बातचीत भारी लगने लगती है।
6. मोटिवेशन खत्म होना और ‘कुछ भी करने का मन न होना’
जब मानसिक थकान बढ़ जाती है, तो उत्साह धीरे-धीरे खत्म होने लगता है। पहले जिन चीजों में खुशी मिलती थी, अब वह भी जिम्मेदारी जैसी लगने लगती हैं। काम शुरू करने में बहुत ताकत लगती है, टालमटोल बढ़ जाता है और ऐसा लगता है कि “बस करने का मन ही नहीं है”। यह भी मेंटल एग्जॉशन का साइन है, जो बताता है कि आपको ब्रेक की जरूरत है।
मानसिक थकान कम करने के तरीके क्या है?
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- काम के बीच में 1 से 5 मिनट का ब्रेक लें। ये छोटे ब्रेक्स भी दिमाग को रीसेट कर सकते हैं।
- सोने का समय फिक्स करें। एक तय समय पर सोएं और स्क्रीन-टाइम कम करें।
- माइंडफुलनेस या मेडिटेशन का सहारा लें। दिन के 10 मिनट मेडिटेशन करना भी आपके लिए मददगार हो सकता है।
- हल्की एक्सरसाइज करना भी जरूरी है। वॉक करना, स्ट्रेचिंग या योग करने से दिमाग को राहत मिलती है।
- वर्कलोड डेलीगेट करना सीखें। हर चीज खुद करने की कोशिश न करें। यह मानसिक थकान बढ़ाता है।
- अगर साइन्स लंबे समय तक बने रहते हैं, तो साइकोलॉजिस्ट या थेरेपिस्ट से मदद लें।
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